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अहम पहल: निजी स्कूलों में स्क्रीन टाइम तय, अब बोर्ड पर ही पढ़ाएंगे गुरु जी; जिला प्रशासन तैयार कर रहा गाइडलाइन

Thu, 13 Aug 2026 06:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवीन कुमार, ग्रेटर नोएडा

सार

उन्हें बोर्ड का प्रयोग करना होगा। इस संबंध में जिला प्रशासन जल्द ही आदेश जारी करने वाला है। तैयार गाइडलाइन के मुताबिक प्राइमरी बच्चों के लिए अधिकतम स्क्रीन टाइम 30 मिनट और बड़े बच्चों का 60 मिनट तय किया गया है।
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AI Pic - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निजी स्कूल बच्चों को अधिक देर तक स्क्रीन के माध्यम से नहीं पढ़ा सकेंगे। उन्हें बोर्ड का प्रयोग करना होगा। इस संबंध में जिला प्रशासन जल्द ही आदेश जारी करने वाला है। तैयार गाइडलाइन के मुताबिक प्राइमरी बच्चों के लिए अधिकतम स्क्रीन टाइम 30 मिनट और बड़े बच्चों का 60 मिनट तय किया गया है।

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गाइडलाइन तैयार करने में डब्ल्यूएचओ और शिक्षा विभाग के नियमों का अध्ययन किया गया है। नोएडा और ग्रेनो में 1200 से अधिक निजी स्कूल है। अधिकांश स्कूल स्मार्ट कक्षा का प्रयोग कर रहे हैं। कई अभिभावक संघ ने शिकायत की है कि बच्चों को स्कूलों में स्क्रीन से पढ़ाया जा रहा है।

शिक्षकों की जगह वीडियो से पढ़ा रहे हैं। यहां तक कि कई स्कूलों में डांस व संगीत की कक्षा भी वीडियो से चल रही है।  आरोप है कि 50 से 60 प्रतिशत समय बच्चों को स्क्रीन के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। 6 घंटे में से तीन घंटे स्क्रीन के सामने बीता रहे हैं। 
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सामान्य बोर्ड का करना होगा प्रयोग
स्कूलों में प्रशासन सामान्य बोर्ड को जरूरी करने जा रहा है। शिक्षकों को लिखकर, पढ़कर बच्चों को समझाना होगा। निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्ति होंगे। लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी होगी।

उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम के नियम

  • 1 वर्ष से कम उम्र : स्क्रीन टाइम की बिल्कुल अनुमति नहीं है।
  • 1 से 2 वर्ष की उम्र : 1 साल के बच्चों के लिए स्क्रीन पूरी तरह मना है। 2 साल के बच्चों के लिए एक घंटे से जितना कम हो उतना बेहतर।
  • 3 से 4 वर्ष की उम्र: पूरे दिन में अधिकतम 1 घंटा।
  • 5 से 10 वर्ष की उम्र (प्राइमरी स्कूल) : मनोरंजक स्क्रीन टाइम अधिकतम 1 से 2 घंटे
  • 10 से 18 वर्ष की उम्र (हाई स्कूल) : 2 घंटे से कम स्क्रीन टाइम होना चाहिए। इसमें होमवर्क के अलावा अन्य डिवाइस का उपयोग शामिल है।

काफी अभिभावक व अभिभावक संघ स्कूलों में स्क्रीन टाइम अधिक होने की शिकायत कर चुके हैं। नियमों के तहत स्कूलों में स्क्रीन टाइम की सीमा तय की जाएगा। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा।
-मेधा रूपम, जिलाधिकारी

कई जगह अभिभावक ही डिजिटल बोर्ड की मांग करते है। हालांकि बैलेंस बनाना बेहद जरूरी है। स्क्रीन से बच्चों को पढ़ाया जाएगा तो उनका समूचित विकास नहीं होगा। विदेशों में भी स्कूल पुरानी शिक्षा प्रणाली पर आ रहे है।

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- सुधा सिंह, प्रधानाचार्या रायन इंटरनेशनल स्कूल

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