उपराष्ट्रपति ने किया कौमारकॉन-2026 का उद्घाटन, बच्चों के स्वास्थ्य में आयुर्वेद के इस्तेमाल पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की प्रभावशीलता साबित करने, मरीजों का भरोसा मजबूत करने और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को दुनिया भर में पहचान दिलाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है। यह बातें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईएआईए) में बच्चों के स्वास्थ्य पर आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कौमारकॉन-2026 के उद्घाटन समारोह में कही। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने के लिए उनके प्रभावों का वैज्ञानिक आधार पर अध्ययन करना होगा। उन्होंने संस्थान के स्थापना दिवस पर एआईएआईए को बधाई देते हुए अनुसंधान, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार निवेश की जरूरत पर भी जोर दिया।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का उल्लेख किया, जिसके तहत एआईएआईए को एम्स के समकक्ष विकसित करने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि संस्थान इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर उन्होंने आयुर्वेद की प्रभावशीलता साबित करने और इसे दुनिया भर में पहचान दिलाने के लिए वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया। सम्मेलन के साथ संस्थान का स्थापना दिवस भी मनाया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय बच्चों के स्वास्थ्य के भविष्य को बेहतर बनाने में आयुर्वेद, वैज्ञानिक अनुसंधान और नई चिकित्सा तकनीकों की भूमिका रहा। इसमें देश-विदेश के आयुर्वेद विशेषज्ञों, डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
बच्चों के स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका पर जोर:
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुर्वेद को वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता जांच और प्रमाणों पर आधारित इलाज के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों के साथ जोड़ना जरूरी है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुर्वेद के विकास के लिए वैज्ञानिक प्रमाण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा को मजबूत बनाने के लिए अनुसंधान और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत:
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने आयुर्वेद के क्षेत्र में तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पांच डिजिटल पहलों की शुरुआत की। इनमें आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल, एआईएआईए-आईकेन वेबसाइट, आयुर्वेद डिजिटल इनोवेशन एंड वेंचर एक्सेलेरेशन फैसिलिटी (आयुदिवा), वमन एप और पंचकर्म असेसमेंट एप शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य आयुर्वेद के क्षेत्र में नए स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करना, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करना और उपचार की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है।
एक दशक की उपलब्धियों को किया साझा: एआईएआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पीके प्रजापति ने संस्थान की दस साल की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संस्थान ने शिक्षा, इलाज और अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी सुविधाओं का विस्तार किया है। संस्थान को एनएएसी ए++ मान्यता भी मिली है। उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अनुसंधान के लिए किंडर लैब और एआई आधारित औषधि निर्माण व खुराक निर्धारण में मदद करने वाली आयूरइन्फॉर्मेटिक्स लैब की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान अमेरिका की महारिषि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी और एआईआईए के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।