उत्तर प्रदेश सरकार ने फीस रेगुलेटरी अध्यादेश लागू कर दिया है। ताकि स्कूलों की मनमानी पर लगाम लग सके। अध्यादेश के तहत स्कूलों को 2015- 2016 से 2017-2018 तक की फीस की जानकारी वेबसाइट पर देनी थी। मगर अब तक सभी स्कूलों ने ऐसा नहीं किया।
वहीं, कुछ स्कूलों ने गोलमोल जानकारी दी है। अभिभावकों का कहना है कि जिन स्कूलों ने फीस कम की है, अन्य शुल्क के नाम पर उसकी भरपाई कर दी। आई कार्ड जैसी तमाम चीजों पर शुल्क बढ़ाकर फीस पहले जितनी ही कर दी गई है। उनकी जेब का बोझ तो कम हुआ ही नहीं। ऐसे में अभिभावक परेशान हैं। उनका कहना है कि स्कूलों ने अध्यादेश को ही घुमा दिया है। अब मेरठ मंडल के कमिश्नर की अध्यक्षता में मीटिंग होगी।
ऑल नोएडा पैरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना ने बताया कि बहुत ही कम स्कूलों ने फीस कम की है। बाल भारती स्कूल ने गुम होने की स्थिति में आई कार्ड दोबारा कार्ड बनाने पर 1 हजार रुपये चार्ज कर दिया है। महासचिव के अरुणाचलम ने बताया कि अभी तक सिर्फ तीन स्कूलों ने पूरी तरह से अध्यादेश के अनुसार जानकारी अपडेट की है। हम लोग शिक्षा विभाग से भी मिले थे। जिलाधिकारी के माध्यम से स्कूलों को दोबारा रिमाइंडर भेजा गया है।
70 फीसदी स्कूलों ने दी जानकारी
शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर विष्णु पांडेय ने बताया कि अभी 70 प्रतिशत स्कूलों ने ही फीस की जानकारी वेबसाइट पर अपडेट की है। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर निगरानी की जा रही है। जल्द ही मेरठ कमिश्नर के साथ स्कूलों की मीटिंग होगी। स्कूलों को एक और मौका दिया जाएगा। अगर जानकारी अपडेट नहीं की तो अध्यादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
आधी जानकारी दी
कई स्कूलों ने सिर्फ सत्र 2017 - 2018 की ही फीस अपडेट की है। कई स्कूलों ने सुविधाओं, डांस रूम, म्यूजिक रूम, स्वीमिंग पूल जैसी जानकारी भी उपलब्ध कराई है। वहीं, स्कूलों को फीस के साथ टीचर की सैलरी कितनी बढ़ाई है, इसकी जानकारी भी देनी थी।