एक तरफ तो मेवात क्षेत्र के सरकारी स्कूल पिछले कई वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी और क्षेत्र के गांव सक्काबास का प्राथमिक विद्यालय ऐसा भी है जहां 60 बच्चों पर चार अध्यापकों की नियुक्ति जिला शिक्षा विभाग ने की हुई है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत उक्त विद्यालय में 70 बच्चों पर दो अध्यापकों की नियुक्ति होनी चाहिए। जबकि गांव सक्काबास के प्राथमिक विद्यालय में 60 छात्रों पर चार अध्यापकों की तैनाती शिक्षा विभाग पर सवालिया निशान लगा रहा है।
बता दें कि जिले के अधिकतर विद्यालयों में पिछले कई वर्षो से शिक्षकों एवं अन्य संसाधनों का भारी टोटा चला आ रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर स्कूलों के मुखिया कई बार जिला शिक्षा विभाग एवं सरकार से अध्यापकों की मांग लगातार करते आ रहे हैं। लेकिन इन स्कूलों को शिक्षक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. असफाक आलम ने बताया कि खंड के कई गांवों के स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों की पिछले कई वर्षो से भारी कमी चली आ रही है। ऐसे भी स्कूल हैं जहां 200 बच्चे हैं और अध्यापक एक ही। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह छात्रों की संख्या के आधार पर स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति कर क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने का कार्य करे।
इस विषय पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वजीर चंद मजोका ने कहा कि अगर सक्काबास गांव के स्कूल में इस प्रकार का मामला है तो वह कल ही इस पर संज्ञान लेकर वहां से अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति रद कर देंगे और अध्यापकों को अन्य विद्यालयों में भेजेंगे।