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RTI का खुलासा, स्कूलों को नहीं बच्चों की चिंता

Thu, 15 May 2014 08:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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स्कूल बसों की रफ्तार नौनिहालों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य है, लेकिन जिले में 80 फीसदी स्कूल बसें इस नियम पर खरी नहीं उतरतीं। लगातार हो रहे हादसे परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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जिले की सड़कों पर सुरक्षित सफर के दावे कितने सही हैं, इसका अंदाजा एक आरटीआई के जवाब से लगाया जा सकता है। आरटीआई के जरिए परिवहन विभाग से वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर की जानकारी मांगी गई थी। इन सवालों के जवाब चौंकाने वाले थे।

विभाग के मुताबिक स्पीड गवर्नर केवल स्कूल बसों के लिए अनिवार्य माना गया है। जबकि अन्य भारी वाहनों में स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता नहीं समझी गई है। आरटीआई के तहत वर्ष 2012 और 2013 में बिना स्पीड गवर्नर लगे वाहनों पर कार्रवाई का विवरण मांगा गया था।
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इस सवाल का जवाब और भी हैरान कर देने वाला है। विभाग के अनुसार चेकिंग के दौरान दो साल में कोई भी स्कूल बस ऐसी नहीं मिली जिसमें स्पीड गवर्नर न लगा हो।

परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो अकेले नोएडा में ही एक हजार से ज्यादा बसों में स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। जबकि स्पीड गवर्नर लगी बसों की संख्या महज 682 बताई गई है। अपने ही जवाब से परिवहन विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। सड़कों पर बरती जा रही लापरवाही मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

आदेशों की उड़ रहीं धज्जियां
परिवहन विभाग ने अक्तूबर 2012 में आदेश दिए थे, जिसके मुताबिक स्कूल बसों की गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित करने के लिए स्पीड गवर्नर अनिवार्य किया गया था। चालक का ध्यान न भटके इसके लिए बस में स्पीड अलार्म लगाना भी जरूरी किया गया। इसके अलावा लोकेशन आसानी से पता लगाने के लिए बसों को जीपीएस से लैस करने के आदेश दिए गए थे।

क्या कहता है एमवी एक्ट
मोटर वाहन अधिनियम 1989 की धारा 118 के तहत प्रत्येक परिवहन यान में स्पीड गवर्नर लगा होना अनिवार्य है। वाहन में लगा स्पीड गवर्नर राज्य परिवहन प्राधिकरण या फिर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण की सील लगा होना चाहिए। इसे बिना सील तोड़े न तो हटाया जा सकता है और न ही नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
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