प्रामाणिकता पर उठ रहे सवाल
इस वीडियो के वायरल होने के बाद छात्रों अभिभावकों की ओर से प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठने लगे। काफी छात्र अपने-अपने प्रश्न पत्र के क्यूआर कोड को स्कैन करके देखने लगे लेकिन उन्हें साधारण अक्षर या कोड ही दिखा। इस कारण से भ्रम की स्थिति रही। बताया जा रहा है कि यह घटना एप्लायड मैथमेटिक्स के कुछ प्रश्न पत्रों में हुई।
बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी सफाई
सीबीएसई ने गणित परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर उठे विवाद पर स्पष्ट किया है कि प्रश्नपत्र पूरी तरह से असली हैं और उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की सेंध नहीं लगी है। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि 9 मार्च 2026 को आयोजित बारहवीं की गणित की परीक्षा के दौरान कुछ प्रश्नपत्र सेट में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर एक यूट्यूब वीडियो का लिंक खुलने की जानकारी सामने आई हैं। इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच प्रश्नपत्र की सत्यता और सुरक्षा को लेकर शंकाएं पैदा हो गई थीं।
क्यों दिया गया क्यूआर कोड का फीचर?
सीबीएसई ने कहा कि प्रश्नपत्रों में कई तरह के सुरक्षा फीचर दिए जाते हैं, जिनमें क्यूआर कोड भी शामिल हैं। इन क्यूआर कोड का उद्देश्य किसी भी संदिग्ध स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता की जांच करना होता है। इसमें सेट नंबर, सीरियल नंबर या एन्क्रिप्टेड जानकारी रहती है जिससे यह पता चलता है कि दस्तावेज असली है और उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि इस मामले में प्रश्नपत्र पूरी तरह से वास्तविक हैं और उनकी गोपनीयता या सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है।
घटना को गंभीरता से लिया
बोर्ड ने कहा कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर यूट्यूब लिंक खुलने की घटना को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। बोर्ड परीक्षा की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी है। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को निष्पक्ष और व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना है, जिसके लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय लगातार मजबूत किए जा रहे हैं।