लाल किला पर हमला करने वाले आतंकी आरिफ उर्फ अशफाक की फांसी पर रोक लगा दी है। दरअसल आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में सजा माफ करने की मांग की थी।
आरिफ के अनुसार वह मामले में अब तक 14 साल 4 महीने की सजा भुगत चुका है।
उसके मुताबिक यह यह सजा उम्रकैद की सजा के बराबर है। इसके बाद भी अगर उसे फांसी दी जाती है तो संविधान की धारा 21 का उल्लंघन होगा। याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर रोक लगा दी और मामला संवैधानिक पीठ को सौंप दिया।
हमले गई थी तीन लोगों की जान
22 दिसंबर 2000 में दिल्ली के लाल किले पर हुए हमले तीन लोगों की मौत हो गई थी।। इसमें हमले में सेना के दो जवानों समेत तीन लोग मारे गए थे।
आरिफ उर्फ अशफाक इसी मामले में पकड़ा गया मुख्य आरोपी है। तब से वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है।
बाद में आरिफ को कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी। सोमवार को इसी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर रोक लगा दी।
इसी मामले में छह बरी भी हुए थे
2011 में इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि मोहम्मद आरिफ, लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी है। कोर्ट ने कहा कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर दिल्ली की निशानी कहलाने वाले लाल किला पर हमला किया था, जिसकी सजा फांसी है।
हालांकि इसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरिफ की मौत की सजा बरकरार रखी थी लेकिन छह अन्य को बरी कर दिया गया था। इन छह लोगों में श्रीनगर के रहने वाले बाप-बेटे, नाजिर अहमद कासिद और फारुख अहमद कासिद के अलावा अशफाक की भारतीय नागरिक पत्नी यूसुफ फारुखी को बरी कर दिया था।