बता दें कि गाजियाबाद स्थित नशा मुक्ति केंद्र में रुटीन जांच को लेकर एम्स की ओर से डॉक्टरों का दल सप्ताह में एक दो बार जाता रहता है। चूंकि पिछले चार दिन से सरकारी अवकाश होने के कारण सोमवार को डॉक्टरों का जाना तय था। सोमवार सुबह बस में करीब 25 डॉक्टर मौजूद थे। नशा मुक्ति केंद्र पर तमाम रोगियों की जांच के बाद बस गाजियाबाद से दिल्ली की ओर रवाना हुई।
इस बीच यूपी बॉर्डर पर चंद आंदोलनकारियों ने बस को चारों ओर से घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। बस में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि रेलवे ट्रैक पर बिछने वाले पत्थरों से आंदोलनकारी हमला कर रहे थे। उनकी बस के ज्यादातर कांच टूट गए थे। सभी डॉक्टरों ने अपनी जान बचाने के लिए सीट के नीचे घुसना ही ठीक समझा। एक डॉक्टर ने बताया कि आंदोलनकारियों की संख्या कम होने की वजह से बड़ा हादसा टल गया। हिंसा करने वालों में ज्यादातर 17 से 22 वर्ष तक की आयु के लड़के थे।