सुप्रीम कोर्ट ने जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट निचली अदालतों, ऊंची अदालतों और अपने जजों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के लिए सरकार को निर्देश दे। लेकिन सर्वोच्च अदालत ने इससे यह कह कर इनकार कर दिया है कि इस सिलसिले में फैसला लेने का काम सरकार का है।
चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् की अगुवाई वाली बेंच ने लोकहित याचिका पर फैसला देते हुए कहा कि अदालत सरकार को इस तरह का निर्देश देने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। इस तरह के मामलों में सर्वोच्च अदालत का न्यायिक पक्ष फैसला नहीं कर सकता। लोकहित याचिका आरके कपूर ने दायर की थी।
पेशे से वकील कपूर की याचिका में कहा गया था निचली अदालतों के जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ा कर 62 साल कर देनी चाहिए। हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ा कर 65 साल कर दी जाए। सुप्रीम कोर्ट के जजों को 65 के बजाय 67 साल में रिटायर किया जाए।
कपूर का कहना था कि संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को सभी अदालतों में जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ा देनी चाहिए। सात अक्टूबर को बेंच ने कपूर को कहा था कि वह अपना प्रस्ताव लेकर सरकार के पास जाएं। इसके बाद कपूर ने कानून मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी। लेकिन कानून मंत्रालय की ओर से कोई कार्यवाही न करने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका दायर की।