विधानसभा में सोमवार को अस्पतालों और मोहल्ला क्लीनिक में दवाओं की कमी और मुफ्त जांच बंद होने के मामले पर चर्चा हुई। इस दौरान विधायकों की शिकायतें सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध नहीं कराने की योजना बनाई गई है, जबकि लाखों लोग बीमारी और दवाइयों के लिए अस्पतालों से लेकर मोहल्ला क्लीनिक पर आश्रित हैं। लिहाजा अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में दवाओं की कमी को लेकर मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ मामले दर्ज कराए जाएंगे।
विधानसभा में आप विधायक राजेंद्र पाल गौतम ने अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में दवाओं की कमी और कुछ संबंधित अधिकारियों की ओर से मोहल्ला क्लीनिकों में मुफ्त जांच को रोकने का मुद्दा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया था। इस मौके पर सौरभ भारद्वाज ने दो रिपोर्ट पेश कीं, जिनमें मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव की रिपोर्ट भी शामिल थी। दोनों रिपोर्ट में दावा किया गया कि अस्पतालों और मोहल्ला क्लीनिकों में दवाएं उपलब्ध थीं और जो अनुपलब्ध थीं, उन्हें बदल दिया गया। उधर, भारद्वाज ने कहा कि जनवरी में दवा की कमी और मोहल्ला क्लीनिक में जांच बंद होने का मामला सामने आया था। इस बारे में मुख्य सचिव को 12 फरवरी, फिर चार मार्च और 18 मार्च को पत्र लिखा गया, लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उधर अस्पतालों के पास स्थानीय खरीद या अनुबंध दर पर दवा खरीद के वैकल्पिक तरीके होने के बावजूद इसका असंभव करार दिया गया।
दवा की आपूर्ति रोकने की पूर्व नियोजित साजिश
भारद्वाज ने कहा कि टेंडर में बाधा डालकर दवा आपूर्ति रोकने की पूर्व नियोजित साजिश थी। इस मामले में उन्होंने उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनको बार-बार पत्र लिखा और बताया कि मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव दवाओं की कमी को छिपाकर उन्हें और दिल्ली सरकार को गुमराह कर रहे है। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आप सरकार को भंग करने की साजिश
विधानसभा में सोमवार को आप विधायकों ने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार आप सरकार को भंग कराने की साजिश रच रही है। आप विधायक मदनलाल की पहल पर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की आशंका पर विधानसभा में चर्चा हुई। इस मौके पर उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फर्जी मामले में गिरफ्तार किया है, वहीं दूसरी ओर ऐेसा कोई नियम व कानून नहीं है कि मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त नेता की गिरफ्तारी होने पर त्याग पत्र देना जरूरी है और उनके त्याग पत्र देने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। उधर आप विधायक बीएस जून ने तर्क दिया कि दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने जैसी एक भी कारण नहीं है। आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने कहा कि जेल से सरकार चलाने के मामले में कोई रोक नहीं सकता।