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कंपनियों का खेल: सैंपल टेस्ट में फेल हुआ ई-रिक्शा

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सैंपल टेस्ट के आधार पर बिना किसी मानक के चल रहे पुराने ई-रिक्शा को पास करने की तैयारी पर टेरी की 2013 में आई एक रिपोर्ट सवाल उठाती है।
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केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने नए ई-रिक्शा के लिए मानक तय किया है। साथ ही पुराने ई-रिक्शा को निर्माता कंपनी के आधार पर सैंपल टेस्टिंग के बाद उसे मंजूरी देने की बात कही है। मगर टेरी की रिपोर्ट की मानें तो सड़कों पर पहले से चले रहे ई-रिक्शा में एक ही कंपनी के मॉडल में अंतर है।

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने सोमवार को ई-रिक्शा को लेकर जारी अधिसूचना में नए ई-रिक्शा के लिए कंपनियों के लिए दिशा-निर्देश बनाए हैं। मगर पुराने ई-रिक्शा के लिए एक एजेंसी से सैंपल टेस्ट के बाद पास करने की बात कही।
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इसके लिए पंजीकृत ई-रिक्शा एसोसिएशन से सैंपल टेस्ट के लिए 30 नवंबर 2014 तक का समय दिया है। इस दौरान एसोसिएशन अलग-अलग मॉडल के ई-रिक्शा का सैंपल टेस्ट (एक कंपनी द्वारा निर्मित रिक्शों में से कोई भी एक) कराकर राज्य परिवहन विभाग से उस मॉडल का रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

एक ही कंपनी बना रही है 18 तरह के ई-रिक्‍शे

इस तरह दिल्ली में कुल 18 ई-रिक्शा कंपनियों यानी 18 मॉडल के ई-रिक्शा सड़क पर चल रहे हैं। ऐसे में हर मॉडल के एक रिक्शा का सैंपल टेस्ट के बाद सभी को चलने की अनुमति मिल जाएगी।

टेरी ने दिल्ली परिवहन विभाग के कहने पर 2013 में एक अध्ययन किया था। तब सभी कंपनियों के 53 ई-रिक्शा का अध्ययन किया था। अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि एक ही कंपनी के अलग-अलग ई-रिक्शा के मॉडल में काफी अंतर है।

किसी भी कंपनी का कोई तय मानक नहीं है, जिसके आधार पर ई-रिक्शा बनता है। रिपोर्ट में तत्काल इसे बंद करने की सिफारिश भी की थी।

ट्रैफिक मोटर व्हीकल एक्सपर्ट एसपी सिंह के मुताबिक अगर एक ही कंपनी के ई-रिक्शा के मॉडल में अंतर है तो सैंपल टेस्ट के आधार पर उस कंपनी के सभी मॉडल को सुरक्षित कैसे माना जा सकता है।

उन्होंने ने कहा कि सरकार यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। पुराने ई-रिक्शा को सड़क पर नहीं आने देंगे।
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ई-रिक्शा का मसौदा तैयार, स्पीड 25 किमी

ई-रिक्शा चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी होगी। स्पीड 25 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होगी। ड्राइवर को छोड़कर इसपर चार सवारी और 40 किलो का वजन ही एक बार ले जा सकेगा। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में ई-रिक्शा को लेकर यह प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर लोगों से आपत्ति व सुझाव मंगाने के लिए दस दिन का समय रखा है।

ई-रिक्शा के लिए लाइसेंस जरूरी करने के साथ इसे तीन साल में रिन्यू कराने का भी प्रावधान किया गया है। ड्राइविंग लाइसेंस जारी होने के बाद तीन साल के लिए ही वैध होगा। यही नहीं प्रत्येक तीन साल में चालक को ई-रिक्शा का फिटनेस सर्टिफिकेट भी लेना होगा। इसकी स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

यह मोटर क्षमता 2000 वाट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। नए निर्मित होने वाले ई-रिक्शा के लिए जो प्रावधान किया है। उसमें पार्किंग लाइट, रिवर्स गियर लाइट, स्टॉप लाइट, इसके अलावा अब पहिए में रिम होना जरूरी है।

परिवहन मंत्रालय ने अधिकारियों को इस मसौदे पर सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में बदलाव करने के लिए कहा है। फिलहाल इस मसौदे पर लोगों से आपत्ति व सुझाव मंगाए गए है। दस दिनों के भीतर लोगों को अपना सुझाव लोगों परिवहन मंत्रालय को भेज सकते है।

बताते चले कि दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में बिना किसी पॉलिसी के चल रहे ई-रिक्शा पर पाबंदी लगा दी है। कोर्ट की सख्त रूख के चलते अब सरकार ने इस पर नए अधिसूचना तैयार किया है। अगले दस दिनों में आपत्ति व सुझाव के बाद इसमें फिर सुधार किया जाएगा
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