फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट के नामित चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप

विज्ञापन
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय के नामित मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू के खिलाफ हाईकोर्ट में यौन उत्पीड़न व अन्य आरोप लगाते हुए याचिका दायर की गई है। याचिका दायर करने वाली महिला कई मामलों में विवादित रही है और वह खुफिया एजेंसी रॉ में काम कर चुकी है। इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।
विज्ञापन


दिलचस्प बात है कि याचिका दायर करने वाली महिला ने पहले ही याचिका में स्पष्ट कर दिया है कि उनकी याचिका पर न्यायमूर्ति आरएस एंड लॉ, न्यायमूर्ति एसके मिश्रा, न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल के समक्ष सुनवाई न की जाए क्योंकि इन जजों के खिलाफ भी उसने आरोप लगाए हुए है।

मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष याचिका में आरोप लगाया कि रॉ में उसे प्रताड़ित किया गया और बाद में जबरन रिटायरमेंट लेने के लिए मजबूर किया गया।
विज्ञापन


उसने कहा कि इसके बाद उसने कानून की शिक्षा ली और उसके कई मामलों की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय के जज दत्तू के समक्ष हुई व उन्होंने सभी याचिकाएं खारिज कर दी।

उन्होंने यौन उत्पीड़न इत्यादि आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय व कानून एवं न्याय मंत्रालय ने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम जज दत्तू को सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नामित करने के लिए राष्ट्रपति को सिफारिश भेजी थी, जिसके आधार पर वे मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगे। अत: सभी पक्षों को अपनी सिफारिश वापस लेने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन

केंद्र सरकार, उपराज्यपाल सहित नौ को नोटिस

हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) को भंग करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और 4 नए सदस्यों सहित 9 को नोटिस जारी कर तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, उपराज्यपाल के अलावा परिषद में नियुक्त सदस्य करण सिंह तंवर, अनिता आर्य, बीएस भाटी, अतुल रशीद अंसारी सहित सभी को 3 नवंबर तक जवाब देने को कहा है।

खंडपीठ ने एनडीएमसी के पूर्व उपाध्यक्ष ताजदार बाबर, पूर्व विधायक अशोक आहुजा, सुखा राम और आईए सिद्दकी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

याची के अधिवक्ता केसी मित्तल ने खंडपीठ को बताया कि केंद्र सरकार बदनियती व गैरकानूनी रूप से काम कर इस प्रकार का रवैया अपना रही है। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत उनके मुवक्किलों को कार्यकाल खत्म होने से पूर्व ही हटाया जाए। स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी काम किया है। अत: 5 सितंबर को जारी अधिसूचना को रद्द किया जाए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें