अब दिल्ली में एम्स की चार टीमें कमान संभालेंगी। इन टीमों में सामुदायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अतिरिक्त महामारी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इनके साथ एनसीडीसी की टीमें भी सर्विलांस के लिए तैनात होंगी। ये टीमें जिला आयुक्त के सीधे संपर्क में रहेंगी और एलजी के साथ लगातार योजनाओं में शामिल भी रहेंगी।
दूसरे लॉकडाउन में भी दिल्ली नियंत्रण से बाहर
देश में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले महाराष्ट्र और गुजरात के बाद दिल्ली में हैं। दूसरा लॉकडाउन 15 अप्रैल को लागू हुआ था। इसके बाद 20 अप्रैल तक हर दिन केंद्र व दिल्ली सरकार की बैठकें चलती रहीं और कंटेनमेंट जोन पर फोकस शुरू हो गया, लेकिन इसके बाद से हर दिन मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई और अब तीन हजार से ज्यादा मरीज हो गए हैं। हालांकि, मृत्युदर बाकी राज्यों की तुलना में नियंत्रण में है।
दिल्ली में बनेंगे माइक्रो कंटेनमेंट जोन
दिल्ली में अब माइक्रो कंटेनमेंट जोन भी बनेंगे, ताकि लोगों तक पहुंच आसानी से बनाई जा सके। बड़े कंटेनमेंट जोन होने से टीमों को लोगों से मिलने में कठिनाई हो रही थी। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने उम्मीद जताई है कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनने से कुछ दिन बाद दिल्ली ऑरेंज और फिर ग्रीन जोन में होगी।
-दिल्ली का पूरा नक्शा ही लाल दिखाई दे रहा है। तमाम प्रयास के बाद भी यहां 11 में से सिर्फ दो जिले ऑरेंज हैं। ग्रीन जोन में लाने के लिए और भी ज्यादा बेहतर प्रयास की जरूरत है। - डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री
-जल्दबाजी में बड़े कंटेनमेंट जोन बना दिए थे। इससे सर्विलांस भी नहीं हो सका। साथ ही जिले भी रेड दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अब एनसीडीसी निदेशक से बैठक के बाद माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाएंगे। - अनिल बैजल, उपराज्यपाल
- दिल्ली में इस वक्त सबसे बड़ी परेशानी जांच रिपोर्ट को लेकर है। रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से पता नहीं चल रहा है कि कौन मरीज है और कौन नहीं। इन मरीजों की पहचान करना सबसे मुश्किल हो रहा है। - सत्येंद्र जैन, स्वास्थ्य मंत्री, दिल्ली सरकार