मैनकाइंड कंपनी की खांसी की दवा का नमूना फेल होते सीरप की बोतलें बाजार से गायब हो गईं। जानकारों की मानें तो अधोमानक दवा को या तो छिपाया गया या फिर इसे बेच दिया गया।
प्रदेशभर में छापामारी के दौरान एक बोतल भी रिकवर नहीं की जा सकी है। इसके पीछे विभागीय अफसरों की मिलीभगत बतायी जा रही है।
गौरतलब है कि सोमवार को ड्रग डिपार्टमेंट ने खांसी की एस्थाकाइंड के एक बैच नंबर की दवा को बाजार से हटाने के आदेश दिए थे। इस दवा का नमूना मिस्ब्रांड मिला था।
अफसरों के अनुसार दवा की सीसी मानकों के अनुरूप नहीं थी। इसके बाद उक्त बैच नंबर की दवा को प्रदेशभर में बाजार से हटाने के आदेश दिए गए। सीरप की करीब नौ हजार बोतलें मेरठ से गाजियाबाद के डासना में लाई गई थी।
यहां से लखनऊ और सीतापुर भेजा गया था। नमूना रिपोर्ट फेल मिलने पर इसको प्रदेशभर में रीकाल करने के आदेश दिए गए। इसके बाद चलाए गए अभियान में एक भी बोतल रीकवर नहीं की जा सकी।
ड्रग इंस्पेक्टर दीपक शर्मा ने बताया कि उक्त बैच नंबर की दवा अभी तक नहीं मिली है। इसको रीकाल करने के आदेश दिए गए हैं।
साथ ही वर्तमान बैच नंबर की जो दवा बाजार में बेची जा रही है, उसका भी नमूना लिया गया है। इसकी रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।