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Delhi: संविदा अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के बगैर वेतन जारी, एलजी ने दिए जांच के आदेश

Fri, 16 Sep 2022 09:13 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

स्कूलों में धन के दुरुपयोग और गबन के मामले में लिप्त दो सेवानिवृत्त और दो मौजूदा वाइस प्रिंसिपल हैं। इनपर सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखे से अतिथि शिक्षकों के नाम पर वेतन जारी करने के आरोप लगे थे, जिनकी स्कूल नियुक्ति भी नहीं की गई थी। मामला मानसरोवर पार्क स्थित गवर्नमेंट ब्वॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जीबीएसएसएस) का है।
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना - फोटो : ANI-फाइल फोटो
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विस्तार
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संविदा अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के बगैर उनके नाम पर वेतन जारी करने में अनियमितता और सरकार धन के दुरुपयोग के मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई की है। भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17ए के तहत दिल्ली के सरकारी स्कूलों (शिक्षा निदेशालय) के चार वाइस प्रिंसिपल (मौजूदा और सेवानिवृत्त) की भूमिका की जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से कराने की मंजूरी दे दी है।

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स्कूलों में धन के दुरुपयोग और गबन के मामले में लिप्त दो सेवानिवृत्त और दो मौजूदा वाइस प्रिंसिपल हैं। इनपर सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखे से अतिथि शिक्षकों के नाम पर वेतन जारी करने के आरोप लगे थे, जिनकी स्कूल नियुक्ति भी नहीं की गई थी। मामला मानसरोवर पार्क स्थित गवर्नमेंट ब्वॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जीबीएसएसएस) का है।

सरकारी धन का दुरुपयोग और अनियमितता के इस प्रकरण में छोटे लाल शास्त्री (सेवानिवृत्त), सत्येंद्र कुमार शर्मा (सेवानिवृत्त), राजीव कुमार और उप प्राचार्य रविंद्र कुमार जाटव के नाम शामिल हैं। नवंबर 2018 की गई ऑडिट में सामने आया कि कि गवर्नमेंट ब्वॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर-1 (मानसरोवर पार्क) में एक अप्रैल, 2016 से 31 मार्च 2018 के बीच तीन संविदा अतिथि शिक्षकों के वेतन के लिए बिल तैयार किए गए। वेतन के तौर पर शिक्षकों को 4,21,656 रुपये जारी कर दिए गए।
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इनमें समीक्षा आर्य, उमा शास्त्री और छोटे लाल के नाम शामिल थे। जांच में सामने आया कि इस स्कूल में इस नाम किसी अतिथि शिक्षक को नियुक्त नहीं किया गया था। इनमें एक वाइस प्रिंसिपल की पत्नी का नाम था।

दिल्ली में करीब 25,000 संविदा अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में अपनाई गई प्रक्रिया पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। इस प्रक्रिया के तहत महज तीन अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार और दूसरे शिक्षकों के नाम पर लाखों की राशि जारी की गई। शिक्षा के क्षेत्र में अगर हजारों शिक्षकों की नियुक्ति में अगर घोटाले का अगर खुलासा होता है तो करोड़ों का मामला हो सकता है। अनियमितताओं और विसंगतियों का 2018 में पहली बार पता चलने के बाद 22 नवंबर, 2019 को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी, दिल्ली) से एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई।

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