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निजामुद्दीन मरकज में शामिल होने वाले थाईलैंड के 34 नागरिकों को जुर्माना लगाकर छोड़ा

Fri, 17 Jul 2020 03:21 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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निजामुद्दीन मरकज (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
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दिल्ली की साकेत कोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थाइलैंड के 34 नागरिकों पर अदालत ने 6000-6000 का जुर्माना लगाकर उन्हें छोड़ दिया। अदालत के निर्देश पर यह जुर्माना पीएम केयर फंड को जमा किया गया है। 7 अन्य थाईलैंड के नागरिकों को ट्रायल के लिए भेज दिया गया है।

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गुरुवार को दी थी 92 इंडोनेशियाई नागरिकों को जमानत
अदालत ने तब्लीगी जमात मामले में इंडोनेशिया के 92 नागरिकों को गुरुवार को जमानत प्रदान कर दी। इन पर वीजा नियम तथा महामारी अधिनियम संबंधी सरकारी आदेश के उल्लंघन तथा अवैध रूप से मिशनरी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने इन्हें मार्च में निजामुद्दीन मरकज में आयोजित जमात से हिरासत में लिया था। दिल्ली पुलिस इनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।

साकेत जिला अदालत की सीएमएम गुरमोहिना कौर ने इन विदेशी जमातियों को दस-दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत प्र्रदान की। इन जमातियों को संबंधित दूतावास तथा जांच अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश किया। यह जमाती अपनी सजा कम कराने के लिए शुक्रवार को अदालत में समझौता याचिका दायर करेंगे। यह याचिका उन्हीं मामलों में दायर की जाती है जिनमें अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान है।
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दिल्ली पुलिस ने इन जमातियों को हिरासत में लेने के बाद सरकारी क्वारंटीन में भेज दिया था। वहां जांच के दौरान इनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बाद हाईकोर्ट की अनुमति से इन जमातियों को अन्य स्थानों पर रखा गया था।

वहीं, हाईकोर्ट ने तब्लीगी जमात मामले में हिरासत में लिए गए मलयेशिया के नाबालिग जमाती का केस एक जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) से दूसरे के समक्ष सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया है। पहले बोर्ड में सदस्यों की पूरी संख्या न होने के मद्देनजर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए 17 वर्षीय मलयेशियाई जमाती का केस किंग्सवे कैंप स्थित जेजेबी-1 से विश्वास नगर स्थित जेजेबी-4 ट्रांसफर करने का आदेश दिया ताकि केस में तेजी से सुनवाई हो सके।

नाबालिग की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि वह भी 121 अन्य मलयेशियाई नागरिकों की तरह ही सजा कम करने के लिए समझौता याचिका दायर करना चाहता है लेकिन जेजेबी-1 में सदस्यों की पूरी संख्या न होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा है। दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि जेजेबी-1 में फिलहाल केवल प्रधान न्यायाधीश हैं जबकि सदस्यों के दो पद रिक्त हैं।

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