सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय की उस याचिका पर सोमवार को सुनवाई पूरी कर ली और आदेश सुरक्षित कर लिया, जिसमें राय ने खुद को जेल भेजने के शीर्षस्थ अदालत के निर्णय को चुनौती दी है।
अदालत ने निवेशकों के बीस हजार करोड़ रूपए से अधिक की रकम नहीं लौटाने से संबंधित मामले में राय को जेल भेजने का आदेश दिया था।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सहारा समूह ने 10 हजार करोड़ रुपये के भुगतान का नया प्रस्ताव अदालत के सामने रखा था।
बैंक गारंटी देगा सहारा समूह
जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहर की दो सदस्यीय पीठ ने सुब्रत रॉय और दो निदेशकों की जमानत के लिये दस हजार करोड़ रूपए का भुगतान करने के सहारा के प्रस्ताव पर भी विचार करने की सहमति दे दी है।
रॉय और दो निदेशक चार मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं। इस मामले में यह पीठ बाद में फैसला सुनाएगी। सहारा समूह ने अपने नए प्रस्ताव में पीठ को भरोसा दिलाया कि वह तीन से चार कार्य दिवसों के भीतर ही तीन हजार करोड़ रूपए का भुगतान करेगा।
जबकि दो हजार करोड़ रूपए नकद 30 मई तक दे देगा। साथ ही समूह ने यह भी कहा है कि वह 20 जून से पहले पांच हजार करोड़ रूपए की बैंक गारंटी भी दे देगा।
सहारा ने नहीं माना था कोर्ट का आदेश
सर्वोच्च अदालत ने इससे पहले कहा था कि यदि रॉय दस हजार करोड़ रूपए का भुगतान करें तो उन्हें जमानत पर छोड़ दिया जाएगा। इस राशि में से पांच हजार करोड़ रूपए बैंक गारंटी के रूप में और शेष रकम नकद जमा करानी थी।
रॉय और समूह के दो निदेशक निवेशकों के बीस हजार करोड़ रूपए बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराने के शीर्षस्थ अदालत के आदेश पर अमल नहीं करने के कारण चार मार्च से न्यायिक हिरासत में हैं।
सहारा समूह का कहना था कि रॉय को तत्काल रिहा किया जाए। ताकि वह शीर्षस्थ अदालत के आदेश का पालन करने के लिये धन की व्यवस्था करने के लिए लोगों से बातचीत कर सकें। सहारा ने बैंक खातों पर लगी पिछले साल 21 नवंबर से लगी रोक हटाने का भी अनुरोध किया था।
सुब्रत रॉय ने दी दलील
गौरतलब है कि इस बीच, सेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने सहारा की विभिन्न कंपनियों की लेखा पुस्तकों पर सवाल उठाए, जिसका सहारा ने पुरजोर विरोध किया।
सुब्रत रॉय ने इससे पहले दलील दी थी कि निवेशकों का बीस हजार करोड़ रूपया सेबी के पास जमा नहीं कराने के कारण उन्हें हिरासत में रखने का शीर्षस्थ अदालत का आदेश गैरकानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने इस आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया था।