प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 9 अगस्त को जिले में सुरक्षित मातृत्व अभियान होना था, लेकिन एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के कर्मचारियों के 9-10 अगस्त दो दिवसीय हड़ताल के कारण स्वास्थ्य विभाग ने इसे टाल दिया है।
अब 11 अगस्त को सिविल अस्पताल समेत तमाम प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह अभियान चलाया जाएगा। जिसमें हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका इलाज किया जाएगा।
बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में भी इसका जिक्र किया था। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की खून, पेशाब, कद, वजन आदि की मुफ्त में जांच की जाएगी।
गर्भवती महिलाओं को दवाईयों को स्वास्थ्य केन्द्रों पर नि:शुल्क दिया जाएगा। इसके अलावा, जोखिमपूर्ण गर्भस्थ महिलाओं को प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र से सिविल अस्पताल में रेफर किया जाएगा।
इसके लिए 102 नंबर एंबुलेंस तैनात रहेगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिला डॉक्टरों की तैनाती की गई है। उप-सिविल सर्जन डॉ. नीलम थापर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को सामान्य अस्पताल के माध्यम से अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से इस अभियान की शुरूआत की गई है ताकि गर्भवती महिलाएं स्वस्थ रह सकें और उनकी प्रसूति जोखिमपूर्ण न हो।
सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ ने बताया कि बड़ी संख्या में एनएचएम के तहत कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके हड़ताल की वजह से कार्यक्रम पूरा नहीं हो पाएगा। इस वजह से सुरक्षित मातृत्व अभियान को दो दिन टालने का निर्णय लिया गया है।
ये महिलाएं आएंगी हाई रिस्क कैटेगरी में
-यदि महिला की उम्र 40 पार हो
-गर्भवती महिला को एनीमिया हो
-शार्ट हाइट मदर (क्योंकि बच्चेदानी छोटी होती है)
-जिन्हें हाईपरटेंशन, हाई या लो रक्तचाप व हार्ट की तकलीफ हो
-मधुमेह, एचआईवी, थायराइड, इंफेक्शन, रिपीटेड प्री टर्म डिलीवरी
-पेट में बच्चे का सही स्थान पर नहीं होना