राज्य के सत्तादल सरकार के मोह में आए अखाड़ा परिषद ने बार एंड डिस्कोथेक संचालक और बिल्डर सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि बना दिया।
सच्चिदानंद अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी का काफी करीबी है। कैलाशानंद ब्रह्मचारी उत्तर प्रदेश सरकार के काफी करीबी हैं और उनके संबंध सरकार के उच्च पदस्थ नेताओं से हैं।
यह सनसनीखेज खुलासा इलाहाबाद के एक संत ने किया है। इनकी महामंडलेश्वर बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस वजह से कैलाशनंद ने की थी उसकी पैरवी
उन्होंने बताया कि सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर सिर्फ इसलिए बनाया गया क्योंकि उसकी पैरवी कैलाशानंद ने की थी। कैलाशानंद सपा सरकार के करीबी हैं और अखाड़ा परिषद का काफी काम सरकार से पड़ता है।
ऐसे में कैलाशानंद की बात मान ली गई और बार संचालक को महामंडलेश्वर बना दिया गया। यह भी बताया जा रहा है कि महामंलेश्वर बनाने में लाखों रुपयों का लेनदेन भी हुआ है।
सचिन दत्ता का सच्चिदानंद गिरि नाम से महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक हुआ था। खुद कैलाशानंद अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं और उन्होंने सचिन दत्ता को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनवा दिया।
नोएडा के घर को आश्रम बनाना चाहता है सचिन दत्ता
अखाड़ा परिषद से जुड़े महंत का साफ कहना है कि वे कैलाशानंद के उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च संबंधों के झांसे में आ गए और सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बना दिया गया।
महामंडलेश्वर पद से सच्चिदानंद गिरि को हटा दिया गया है। मगर सचिन दत्ता सेक्टर-41 स्थित सी- 112 वाले बंगले को आश्रम बनाने की बात मीडिया से कह रहा है।
उसका कहना है कि अब उसका मोह भंग हो चुका है। उसकी पत्नी व बच्चे कहां हैं, पता नहीं। उसका बिजनेस पिता संभाल रहे हैं और जो घर है, उसे वह आश्रम बनाना चाहता है।
वाल्मीकि पर अपमानजनक बात कहने पर बवाल
मीडिया से बातचीत में सच्चिदानंद गिरि द्वारा भगवान वाल्मीकि के खिलाफ अपमानजनक बात कहे जाने पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिल्ली प्रदेश की तरफ से दिल्ली के मयुर विहार थाने में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा गया है।
किसी भी दागदार व्यक्ति को अखाड़ा परिषद बर्दाश्त नहीं करेगा। सच्चिदानंद गिरि उर्फ सचिन दत्ता के विवादों की खबर मीडिया में आने के बाद उसे फौरन हटा दिया गया।
बागमब्री पीठ के महंत आनंद गिरि कहते हैं कि आगे से इस प्रक्रिया को पूरे ध्यान से पूरा किया जाएगा।