शराब कारोबारी से महामंडलेश्वर बनने का सफर तय करने वाले सचिन दत्ता उर्फ सच्चिदानंद गिरि की महिमा उनके पड़ोसियों के गले भी नहीं उतर रही है।
पड़ोसियों का कहना है कि सचिन ने केवल भोग की चाह में योग की चादर ओढ़ी है। सेक्टर में उसका साथ देने वाला कोई नहीं मिला। सेक्टर- 41 में रहने वाले सचिन के एक पड़ोसी ने कहा कि वह साधू बनने लायक ही नहीं था।
सचिन एक नंबर का बिगड़ैल और नशेड़ी था। उससे पड़ोस में कोई भी बात नहीं करता था। एक अन्य पड़ोसी ने बताया कि आसपास के लोगों पर रौब झाड़ना और दिखावा करना उसकी आदत थी।
आए दिन वह पड़ोसियों से झगड़ा करता था। वह रोज लग्जरी गाड़ियां बदलता था और महंगे मोबाइल रखता था। ऐसा इंसान कभी भी महामंडलेश्वर कहलाने लायक नहीं हो सकता।