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बिजली कटौती की आड़ में 350 करोड़ का खेल, बिल्डर भी हैं शामिल

Wed, 15 May 2019 05:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा राहुल कुमार, गाजियाबाद
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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शहर में इन दिनों बिजली कटौती के नाम पर कुछ बिल्डर, आरडब्ल्यूए और विद्युत निगम के अधिकारी बड़ा खेल कर रहे हैं। हाई राइज सोसायटी में बिजली कटौती होते ही जनरेटर की सप्लाई  रेजिडेंट्स को दी जाती है। इसके लिए बिल्डर व आरडब्ल्यूए पदाधिकारी मन चाहे दाम लोगों से वसूल रहे हैं। 

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विभिन्न सोसायटी रहने वाले करीब आठ लाख परिवार अपने बिजली बिल के अलावा चार से पांच हजार रुपये अतिरिक्त हर माह डीजी सिस्टम (जनरेटर चलाने के नाम पर) की बिजली की यूनिट के नाम पर बिल्डर या इलाके की आरडब्ल्यूए को दे रहे हैं। आठ लाख परिवारों के हिसाब से यह रकम 350 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है।

गाजियाबाद को लखनऊ और नोएडा जैसे जिलों के साथ प्रदेश सरकार ने नो ट्रिपिंग जोन में रखा है। इसके बावजूद गर्मी की शुरूआत होते ही जिले में रोजाना दो से चार घंटे की बिजली कटौती होने लगी है। शहर में राजनगर एक्सटेंशन, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा और क्रांसिग्स रिपब्लिक में हाईराइज सोसायटी हैं। 
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यहां भी दो से तीन घंटे की कटौती हो रही है। रेजिडेंट्स का आरोप है कि बिल्डर और आरडब्ल्यूए पदाधिकारी बिजली अधिकारियों से सांठगांठ कर बिजली कटवा देते हैं, जिसके बाद वह जनरेटर की सप्लाई लोगों तक देते हैं।
 
हर परिवार पर चार से आठ हजार तक का बोझ
 बिजली कटौती के दौरान एक परिवार आम तौर पर गर्मियों के मौसम में एक दिन के अंदर जनरेटर की 20 से 25 यूनिट का प्रयोग करता है। इससे औसतन एक आम उपभोक्ता को 13 से 19 रुपये पर यूनिट चार्ज के रूप में देने होते हैं। इस खेल की पड़ताल के लिए अमर उजाला ने सौ से ज्यादा रेजीडेंट्स से बात की। रेजीडेंट्स बताते हैं कि हर महीने वह औसतन  चार से 8 हजार रुपये तक जेनरेटर की बिजली  का बिल देते हैं।

300 सोसायटी में रहते हैं आठ लाख परिवार
आरडब्ल्यूए फेडरेशन के मुताबिक, शहर में इंदिरापुरम, राजनगर एक्सटेंशन और क्रासिंग्स रिपब्लिक सोसायटी इलाकों के साथ-साथ शहर में करीब 300 से अधिक सोसायटी हैं। ऐसे में एक सोसायटी में करीब 800 से 1400 परिवार निवास करते हैं। एक परिवार हर महीने औसतन चार से आठ हजार रुपये तक जेनरेटर के चुकाता है। इस हिसाब से आठ लाख परिवारों की यह रकम औसतन 350 करोड़ रुपये महीना बैठती है। 
 
मल्टी कनेक्शन क्यों नहीं दे रहा विभाग
विभागीय अधिकारियों की माने तो शासन ने मल्टी कनेक्शन देने की योजना बनाई हुई है। इसके बावजूद बिजली विभाग रेजिडेंट्स को मल्टी कनेक्शन नहीं दे रहा है। जबकि विभाग की ओर से बिल्डर को सिंगल कनेक्शन दिया गया है, जिससे रेजिडेंट्स को बिजली मिल रही है। इन दिनों रेजिडेंट्स प्रीपेड मीटर का प्रयोग कर बिजली चला रहे हैं। इसी के जरिए डीजी सिस्टम की यूनिट भी अलग से काउंट हो रही हैं।
 
लोगों ने कहा...
बिल्डर और बिजली विभाग मिलकर बड़ा खेल कर रहे हैं। गर्मी आते ही रोजाना तीन घंटे तक जनरेटर तक की सप्लाई की जा रही है। इससे हमारे परिवार पर 10 हजार रुपये तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। इसका विरोध करने पर अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। - शबनम खान निवासी राजनगर एक्सटेंशन

बिल्डर बिजली अधिकारियों के साथ मिलकर रेजिडेंट्स के साथ ऐसा कर रहे हैं। बिजली कटौती होने के बाद जनरेटर की सप्लाई की जाती है, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पर पड़ रहा है। सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई करनी चाहिए।
- रवींद्र शर्मा निवासी जेएच-7 क्रॉसिग्स रिपब्लिक

जिले में करीब 300 सोसायटी हैं, जिनमें बिल्डर और आरडब्ल्यूए मिलकर इन दिनों चला रहे हैं। ऐसे में बिजली कटौती होने पर 13 से 19 रुपये यूनिट जनरेटर के लिए वसूली जाती है। शहर में कटौती होने पर बिल्डर लोगों की जेब से रुपये वसूल रहे हैं।
रि. कर्नल टीपी त्यागी, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए फेडरेशन 

बिल्डर और आरडब्ल्यूए के इस खेल पर रोक के लिए ही शासन ने मल्टी कनेक्शन देने का नियम पास किया है। सोसायटी के फ्लैट मालिक  आवेदन करें उन्हें तत्काल सिंगल मीटर कनेक्शन दिया जाएगा। इसके बाद लोग अपने घरों में इनवर्टर लगा सकते हैं। बिल्डर अपने स्तर से कटौती नहीं कर पाएंगे। बिजली विभाग मुस्तैद है और अधिकारियों की सांठगांठ की बात निराधार है। अगर किसी की कोई खास शिकायत है तो हमें बताएं कार्रवाई होगी।
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-आरके राणा, चीफ इंजीनियर विद्युत निगम

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