फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: दिल्ली में कारोबार के नियम बदलेंगे, 13 प्रमुख सुधारों को मिलेगा कानूनी आधार

विज्ञापन
विज्ञापन
अगले हफ्ते कैबिनेट में आएगा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल-2026, एमपीडी-2041 से बदलेंगे बिल्डिंग और जमीन के नियम
विज्ञापन

लाइसेंस-एनओसी की प्रक्रिया होगी सरल और समयबद्ध, एलजी ने विभागों को मध्य अगस्त तक लंबित सुधार पूरे करने के दिए निर्देश

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल-2026 अंतिम रूप ले चुका है और अगले एक सप्ताह में इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। इस विधेयक के जरिए कारोबार से जुड़े दूसरे चरण के 28 सुधारों में से 13 प्रमुख सुधारों को कानूनी आधार मिलेगा। सरकार का दावा है कि इससे लाइसेंस, एनओसी और अन्य सरकारी मंजूरियों की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
बुधवार को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बिल की तैयारियों और सुधारों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में उपराज्यपाल ने सभी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिए कि जिन प्राथमिक सुधारों की पहचान की जा चुकी है, उन्हें अगस्त के मध्य तक हर हाल में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारों के क्रियान्वयन में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने भी सभी विभागों से तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
विज्ञापन

सरकार ने बताया कि इस विधेयक का मसौदा 29 विभागों से सुझाव लेने और विभिन्न हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य उद्योग, व्यापार और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को कम जटिल बनाना और नियामकीय बोझ घटाना है, ताकि निवेशकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।
बिल लागू होने के बाद विभिन्न विभागों की मंजूरियों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। लाइसेंस, एनओसी और अन्य अनुमतियों की समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही दोहराव वाली मंजूरियों और अनुपालन संबंधी औपचारिकताओं को कम करने पर भी जोर रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और दिल्ली की कारोबारी प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि कई अहम सुधार मास्टर प्लान दिल्ली-2041 (एमपीडी-2041) से जुड़े हैं। इसके लागू होने के बाद औद्योगिक और व्यावसायिक भूखंडों के सेटबैक, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर), ग्राउंड कवरेज और अन्य विकास नियंत्रण मानकों में बदलाव का रास्ता खुलेगा। साथ ही भूमि उपयोग को लेकर विभिन्न एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र की अस्पष्टता भी दूर होगी, जिससे भवन निर्माण और निवेश संबंधी कई लंबित सुधार लागू किए जा सकेंगे।

सरकार शिक्षा और नागरिक सेवाओं से जुड़े कानूनों में भी बदलाव की तैयारी कर रही है। शिक्षा क्षेत्र में नियमों को सरल बनाने तथा राइट टू सर्विस कानून में अपील का अधिकार जोड़ने वाले विधेयकों का मसौदा तैयार हो चुका है। इन्हें आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की योजना है। समीक्षा बैठक में केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय, दिल्ली सरकार, एमसीडी, डीडीए, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, अग्निशमन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पहले चरण का काम लगभग पूरा

जनवरी 2025 में शुरू किए गए पहले चरण में 23 प्राथमिक सुधार तय किए गए थे। इनमें से 13 पूरी तरह लागू हो चुके हैं, जबकि चार सुधार नए श्रम कानून लागू होने के बाद अप्रासंगिक हो गए। शेष छह सुधार अंतिम चरण में हैं। इनमें भवन निर्माण नियमों का सरलीकरण, जोनिंग मानकों में लचीलापन और भवन स्वीकृति प्रक्रिया में थर्ड पार्टी की बड़ी भूमिका जैसे बदलाव शामिल हैं। इन्हें नए मास्टर प्लान और यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज-2026 लागू होने के बाद जमीन पर उतारा जाएगा।
विज्ञापन


दूसरे चरण में सुधारों ने पकड़ी रफ्तार

जनवरी 2026 में शुरू हुए दूसरे चरण में 23 प्राथमिक और पांच वैकल्पिक सुधार तय किए गए हैं। जून के मध्य तक केवल तीन सुधार लागू हुए थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर नौ हो गई है। इनमें एमसीडी की दोहरे व्यापार लाइसेंस व्यवस्था समाप्त करना, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नियम सरल बनाना तथा बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया तेज करना शामिल है। 17 अन्य सुधार विभिन्न विभागों में लागू किए जा रहे हैं और लंबित मामलों की संख्या भी लगातार घट रही है।

एक नजर में: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल-2026
कारोबार से जुड़े 13 प्रमुख सुधारों को मिलेगा कानूनी आधार।
सिंगल विंडो सिस्टम से विभिन्न विभागों की मंजूरियां आसान होंगी।
लाइसेंस, एनओसी और अन्य अनुमतियों की समयबद्ध व्यवस्था लागू होगी।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस काउंसिल का गठन होगा।
मुख्य सचिव और जिला स्तर पर अलग-अलग कार्यान्वयन समितियां बनाई जाएंगी।
50 करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव जिला स्तर पर निपटाए जाएंगे।
50 करोड़ से ₹500 करोड़ तक के निवेश पर मुख्य सचिव स्तर पर निर्णय होगा।
500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद फैसला करेगी।
दोहराव वाली मंजूरियों और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं में कमी लाई जाएगी।
डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह मंजूरी प्रणाली लागू होगी।
लक्ष्य निवेश आकर्षित करना, रोजगार बढ़ाना और दिल्ली में कारोबार को अधिक सुगम बनाना है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें