अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में ओवरलोड वाणिज्यिक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) ने ओवरलोडिंग के मामलों में वाहन जब्त रखने की अवधि 90 दिन से घटाकर केवल सात दिन करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वाहन मालिक या परमिट धारक अब 15 हजार रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क जमा कर परमिट निलंबन या निरस्तीकरण की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत पा सकेंगे।
विभाग का कहना है कि इससे लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण होगा, जबकि ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी। मौजूदा व्यवस्था के तहत मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194 के अनुसार ओवरलोड वाहन पकड़े जाने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक अतिरिक्त टन भार पर दो हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी देना पड़ता है। वहीं, अधिनियम की धारा 86 के तहत वाहन का परमिट निलंबित करने और वाहन को 90 दिन तक जब्त रखने का भी प्रावधान है। लंबी जब्ती अवधि के कारण ट्रांसपोर्टरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था और बड़ी संख्या में मामले लंबित बने रहते थे।
एसटीए की हालिया बैठक में इस व्यवस्था की समीक्षा की गई। प्राधिकरण ने पाया कि ओवरलोडिंग से जुड़े मामलों का निस्तारण सात दिनों के भीतर करने के निर्देश पहले से हैं। इसी आधार पर वाहन जब्ती की अवधि 90 दिन से घटाकर सात दिन करने का फैसला लिया गया। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम की धारा 86(5) के तहत उपलब्ध प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए परमिट निलंबन या निरस्तीकरण के स्थान पर कंपाउंडिंग राशि वसूलने का विकल्प लागू करने को मंजूरी दी गई।
बैठक में शुरुआत में कंपाउंडिंग शुल्क 10 हजार रुपये प्रस्तावित किया गया था, लेकिन विचार-विमर्श के बाद इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये तय किया गया। निर्धारित शुल्क जमा करने पर परमिट धारक को लंबी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा और मामले का त्वरित निस्तारण हो सकेगा। हालांकि परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह राहत बिना शर्त नहीं होगी। यदि कोई परमिट धारक कंपाउंडिंग शुल्क जमा नहीं करता है तो वाहन सात दिन तक जब्त रहेगा। इसके बाद भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत परमिट निलंबन समेत अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ओवरलोडिंग पर लगने वाला मूल जुर्माना और अतिरिक्त भार के अनुसार वसूला जाने वाला जुर्माना पहले की तरह लागू रहेगा। अधिकारियों के अनुसार बदलाव का उद्देश्य ओवरलोडिंग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और समयबद्ध बनाना है।
15 हजार देकर लंबी कार्रवाई से मिलेगी राहत
कंपाउंडिंग शुल्क: 15,000 रुपये
शुल्क जमा करने पर परमिट निलंबन/निरस्तीकरण की लंबी प्रक्रिया से राहत
वाहन जब्ती की अवधि 90 दिन से घटकर सात दिन।
मूल जुर्माना (20 हजार रुपये) और अतिरिक्त भार पर लगने वाला जुर्माना पहले की तरह लागू रहेगा।
शुल्क जमा नहीं करने पर सात दिन की जब्ती के बाद अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।