अभी तक जो आम आदमी पार्टी अपने पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर का पक्ष ले रही थी अब वही उनके खिलाफ हो गई है। दिल्ली के सीएम केजरीवाल उनसे नाराज बताए जा रहे हैं।
मामला दरअसल यह है कि जिन सबूतों पर भरोसा करके केजरीवाल ने उन्हें कानून मंत्री बना दिया था वो सबूत ही झूठे हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली चुनाव के चंद रोज पहले ही उनकी फर्जी डिग्री पर सवाल उठे थे और अदालत में मुकदमा भी दर्ज हो गया था।
इन सबके बावजूद तोमर न सिर्फ चुनाव लड़े बल्कि कानून मंत्री भी बने। इसका महत्वपूर्ण कारण जो था वो ये कि तोमर ने केजरीवाल को कॉलेज की तरफ से जारी की गई आरटीआई दिखाई थी जो उनकी डिग्रियों के सच होने की बात कहती थी।
पार्टी से हो सकते हैं बाहर
अब पता चला है कि तोमर ने उस वक्त केजरीवाल को अपने बचाव में जो आरटीआई दिखाई थी वह भी फर्जी थी। इसका खुलासा दिल्ली पुलिस की जांच में हुआ है।
जब बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे दिल्ली पुलिस की टीम तोमर को लेकर फैजाबाद के साकेत कॉलेज पहुंची तो उनसे प्राचार्य कक्ष में लगभग तीन घंटे तक पूछताछ चली।
यहीं पर पता चला कि तोमर के पक्ष में कॉलेज की ओर से मार्च माह की एक आरटीआई में भी सभी जानकारी व हस्ताक्षर पैड आदि फर्जी थे।
प्राचार्य सुरेंद्र दुबे ने कहा कि उन्होंने तोमर मामले में आरटीआई के तहत तीन पत्रों के जवाब दिए हैं। जिस पर कॉलेज ने मार्कशीट जारी न किए जाने की जानकारी दी है।
वहीं शुक्रवार सुबह मनीष सिसोदिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक रीट्वीट करके बताया है कि फर्जी आरटीआई दिखाए जाने से केजरीवाल बहुत आहत हैं और वो तोमर से खासा नाराज भी हैं। सूत्रों के अनुसार संभावना तो यहां तक है कि तोमर को पार्टी से निकाला जा सकता है।
Delhi CM Arvind kejriwal unhappy with ek law minister Jitendra tomar after the RTI turns fake which was produced by Tomar to Kejriwal.— Ashutosh Mishra (@ashu3page) June 12, 2015
Tomar took CM Kejriwal in confidence with an RTI which now turned fake too. CM Kejriwal unhappy with tomar.— Ashutosh Mishra (@ashu3page) June 12, 2015
माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी फर्जी
दिल्ली पुलिस की जांच टीम ने बीएससी वर्ष 1986-87 व 1987-88 सहित सभी दस्तावेज कब्जे में लिए। जांच टीम को लीड कर रहे एसीपी एसपी त्यागी ने उनसे ठहरने से लेकर पुराने मित्र, दुकानदार, रूम मेट आदि के बारे अयोध्या और फैजाबाद में घुमाकर पूछताछ की लेकिन तोमर इधर-उधर टहलाते रहे।
दोपहर बाद पौने तीन बजे उन्हें लैब दिखाने को कहा गया। इस पर तोमर बाहर आए और कॉलेज के विज्ञान भवन में घुस तो गए लेकिन केमिस्ट्री लैब नहीं बता सके। जांच के दौरान तोमर अंतिम वक्त तक साकेत में ही बीएससी की पढ़ाई करने की बात पर अड़े दिखे।
साकेत के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र नाथ दुबे ने बताया कि जितेंद्र तोमर बीएससी प्रथम वर्ष 1986-87 व अंतिम वर्ष 1987-88 में न यहां प्रवेश लिया और न ही एग्जाम दिया। तोमर ने बुंदेलखंड विवि, झांसी का भी फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनवाया था। यह खुलासा विवि द्वारा किए गए वेरिफिकेशन में हुआ है।
यहां से ली थी तोमर ने फर्जी डिग्री
दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को राजधानी के रोहिणी इलाके के एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में रेड मारी। यह रेड इसलिए खास हो गई क्योंकि इसके तार दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के फर्जी डिग्री मामले से जुड़े हैं।
सूत्रों के अनुसार रोहिणी के सेक्टर-8 स्थित एक प्राइवेट इंस्टीट्यूट में फर्जी डिग्री का एक बहुत बड़ा रैकेट चल रहा है। पुलिस के अनुसार संस्था की मालकिन फरार है और संस्था का दरवाजा भी लॉक है।
बताया जा रहा है कि इस संस्था की मालकिन इंदू नामक एक महिला है। जो गायब चल रही है। सूत्रों के अनुसार तोमर को उनकी जाली डिग्रियां इसी महिला ने दिलवाई हैं और वो ऐसा बहुत बड़ा रैकेट चला रही है।