खराब जीवन शैली के कारण लोग हार्ट अटैक से ज्यादा जान गंवा रहे हैं। देश में हर दिन 173 लोगों की मौत हार्ट अटैक से हो रही है। अमर उजाला को प्राप्त आरटीआई दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2014 में 83 हजार 441 लोग हार्ट अटैक के शिकार हुए।
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गृह मंत्रालय ने आरटीआई के तहत वर्ष 2010 से 2014 तक मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू, मधुमेह, ब्रेन हेमरेज और हार्ट अटैक से होने वाली मौतों का आंकड़ा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक बीते पांच वर्षों में इन बीमारियों ने 10 लाख 13 हजार जिंदगियां छीन लीं।
इसमें हार्ट अटैक के शिकार लोगों की संख्या सबसे अधिक तीन लाख 14 हजार 858 थी। वर्ष 2014 की अपेक्षा 2013 में हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या ज्यादा थी। 2013 में 47 हजार 499 लोगों की मौत हुई।
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आंकड़ों में इन बीमारियों से अस्पताल के अलावा हुई मौतों का विवरण शामिल नहीं है
दिल का दौरा
- फोटो : फाइल फोटो
महा रजिस्ट्रार विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इन नौ बीमारियों से हुई सभी मौतें सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुईं। आंकड़ों में इन बीमारियों से अस्पताल के अलावा हुई मौतों का विवरण शामिल नहीं है।
वर्ष 2010 से 2014 तक सभी प्रकार के कैंसर से दो लाख 51 हजार 207, ब्रेन हेमरेज से दो लाख 20 हजार 984, डायबिटीज से एक लाख 64 हजार 281 और एचआईवी एड्स से 19 हजार 461 लोगों की मौतें हुईं। इन पांच वर्षों में मलेरिया से 37 हजार 777, डेंगू से पांच हजार 167 मरीजों की मौत अस्पतालों में इलाज के दौरान हो गई। हालांकि चिकनगुनिया से कोई मौत दर्ज नहीं की गई।
चिकित्सकों का मानना है कि अव्यवस्थित जीवन शैली के कारण लोग डायबिटीज, ब्रेन हेमरेज, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के तेजी से शिकार हो रहे हैं। गौरतलब है कि 17 सितंबर 2016 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में आरटीआई फाइल की गई थी।
इस आवेदन को मंत्रालय ने अक्तूबर में गृहमंत्रालय के महा रजिस्ट्रार विभाग को स्थानांतरित कर दिया। इसके जवाब में महा रजिस्ट्रार विभाग ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने विभाग को इन नौ बीमारियों से मौतों के आंकड़े 26 अक्तूबर को सौंपे थे। इसके अलावा यह भी बताया गया कि कुछ राज्यों से वर्ष 2015 और 2016 की रिपोर्ट विभाग को नहीं प्राप्त हो पाई है।