प्रेमिका से मिलने की चंद्रमोहन की हसरत जेल में भी पूरी नहीं हो पाई। जेल प्रशासन की बंदिशों के चलते उसकी मुलाकात प्रीति से नहीं कराई गई।
गौतमबुद्ध नगर जिला कारागार के बैरक संख्या दो में चंद्रमोहन और महिला जेल में प्रीति बंद है। जेल प्रशासन फिलहाल नियमों का हवाला देते हुए उन्हें नहीं मिलवा रहा है। हालांकि, प्रत्येक शनिवार को जेल में पति और पत्नी को केस से संबंधित बातचीत या अन्य किसी मामले में चर्चा करने के अनुरोध करने पर लोगों को मिलवाया जाता है।
प्रीति से नहीं मिल पाने के कारण आरोपी बेहद परेशान रहा। रिमांड के दौरान भी दोनों की मुलाकात नहीं हो पाई थी। चंद्रमोहन की बैरक और महिला जेल की दूरी महज पांच सौ मीटर है। जेलर मोहम्मद अकरम खां का कहना है कि अगर प्रीति उससे मिलवाने की गुजारिश जेल प्रशासन से करती है, तो विचार किया जाएगा।
करवटें बदलकर बीती रात
जेल में चंद्रमोहन को जमीन पर सोना पड़ रहा है। वह पूरी रात करवटें बदलता रहा। उसे एक दरी और कंबल दिया गया है। जेल सूत्रों का कहना है कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उसके बैरक में करीब तीन सौ से अधिक कैदी हैं।
कैदियों से बयां की दिल की बात
जानकारी के अनुसार, चंद्रमोहन ने कैदियों से बातचीत करनी शुरू कर दी है। उसने अपने दिल की बात दूसरे कैदियों से बयां की है, जिसमें उसने अपनी प्यार की कहानी और प्रेमिका ने मिल पाने का दर्द बताया। अभी तक परिवार का कोई भी सदस्य जेल में चंद्रमोहन से मिलने नहीं आया है।
चने और गुड़ से किया नाश्ता
सुबह 6:30 बजे दोनों ने चने और गुड़ का नाश्ता किया। सुबह 11 बजे उन्हें लंच में चावल, अरहर की दाल और रोटी मिली। दोपहर 12 बजे बैरक को बंद कर दिया गया। शाम चार बजे इसे खोला गया और पांच बजे रात का खाना मिला। शाम सात बजे कैदियों की बैरक फिर बंद कर दी गई।
जिस जेल के लिए आवाज की बुलंद, उसी में हुआ कैद
करीब तीन साल पहले चंद्रमोहन ने जिस जेल को बनवाने की मांग उठाई थी, आज आरोपी उसी जेल में बंद है। चंद्रमोहन शर्मा दस साल से समाजसेवा में सक्रिय रहा है। किसान आंदोलन और महिला उत्पीड़न का विरोध करने जैसे कई मुद्दों पर वह अखबारों की सुर्खियां बना।
भट्टा पारसौल में किसान आंदोलन के दौरान 11 मुकदमे दर्ज होने के चलते उसे डासना जेल भेजा गया था। वहां किसानों की दुर्दशा देखकर चंद्रमोहन ने गौतमबुद्ध नगर में जेल के निर्माण की मांग की थी।
इसके लिए उसने शासन को भी पत्र भेजा था, जिसके पूरा न होने पर आंदोलन चलाने की भी चेतावनी दी गई थी। उसका कहना था कि जनपद में जेल नहीं होने के चलते आंदोलनरत किसानों को डासना जेल में बंद किया गया, जिससे उनके परिजनों को मिलने जाने में काफी दिक्कत होती थी।
पुलिस को नहीं मिल रहा विदेश
हत्याकांड में चंद्रमोहन का साथ देने वाला विदेश अब भी पुलिस की पहुंच से दूर है। विदेश की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापामारी कर रही है। अब तक 12 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे जा चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं।
चंद्रमोहन की गिरफ्तारी के बाद उससे मिली जानकारी के आधार पुलिस ने विदेश को भी वारदात में शामिल माना है। इस वारदात में अपनी भूमिका की जानकारी होने के बाद से ही वह फरार है। विदेश ने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर रखा है। इस कारण उसकी लोकेशन भी ट्रेस नहीं हो पा रही है।
विक्षिप्त व्यक्ति की भी नहीं हो पाई शिनाख्त
जिस विक्षिप्त व्यक्ति को चंद्रमोहन ने कार में जलाया था उसकी शिनाख्त नहीं हो पाई है। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने सहारनपुर और बुलंदशहर दो टीमें भेजी हैं, लेकिन इस व्यक्ति के बारे में अभी कोई सटीक जानकारी नहीं मिली है। कार्रवाई जारी है।