ग्रेटर नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन कांड में अब कई पेंच सामने आने लगे हैं। सबसे पहले तो यह कि अगर घटना को चंद्रमोहन ने अंजाम दिया है तो उसे शहर से भगाने में किसने मदद की है।
इसके अलावा जो मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति था उसे तलाशने और उसके बारे में जानकारी जुटा रही है कि अंतिम दिन किसने उसे देखा था।
कहीं इस घटना में कुछ और लोग तो शामिल नहीं है। इसके अलावा चंद्रमोहन ने एक तीर से दो-तीन नहीं बल्कि कई निशाने साधे हैं।
दरअसल, बीते एक मई की रात का कार आगकांड में जलकर मारे जाने की खबर से जहां पूरा जिला ही नहीं बल्कि कई प्रदेशों तक के लोग सन्न रह गए थे। लेकिन उससे भी ज्यादा सन्न करने वाली खबर शुक्रवार को लोगों के सामने आएगी।
दबी जुबान में पुलिस अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि जब तक चंद्रमोहन ग्रेटर नोएडा नहीं आ जाएगा तब तक वह कुछ नहीं बोलेंगे और जब वह आ जाएगा तो स्वयं ही बोल उठेगा।
युवती के इश्क में पागल हो गया चंद्रमोहन!
चंद्रमोहन ने अपनी मौत का जो तीर चलाया था उससे न केवल एक-दो बल्कि कई निशाने साधे थे जो सही भी लगे थे।
अधिकारिक सूत्र बताते हैं कि सबसे पहले उसे अपने नए प्रेम को परवान चढ़ाना था। इसके बाद उसे अपने परिवार को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना था। जिससे उसकी मौत के बाद कंपनी में नौकरी भी मिल सकती थी और रुपये तो मिलने ही थे।
जिनमें उनका गुजारा आसानी से हो सकेगा। इसके अलावा कासना में जमीन के विवाद को लेकर अपने दुश्मनों से भी बदला लेना था।
सूत्रों की माने तो चंद्रमोहन की कालोनी में एक गांव की युवती रहती थी। जिससे चंद्रमोहन की नजरे चार हो गई और इश्क में इतना अंधा हो गया कि उसने पत्नी और समाज को भी धोखा दे दिया और अपनी कार को जलाकर अपने आप को मरा सिद्ध कर दिया।
....और भी किसी के शामिल होने की है आशंका
पुलिस सूत्रों की माने तो चंद्रमोहन द्वारा अकेले ही घटना को अंजाम नहीं दिया गया है। हो सकता है इस घटना में उसके साथ जाने वाली महिला ने ही साथ दिया हो गया या फिर किसी अन्य व्यक्ति ने सहयोग दिया हो।
कुछ मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल निकाली जा रही है। उनके मिलने के बाद ही मामला साफ हो सकेगा कि इस सड़यंत्र में कितने लोग शामिल है।
अधिकारिक सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को जब वह मीडिया के सामने आएगा तो बताएगा कि कार में कौन जलाया गया था और पेट्रोल किसने डाला था।
जिससे पुलिस ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और पुलिस को गलत सूचना तथा धोखाधड़ी करके रकम वसूलने समेत कई अन्य धाराओं में भी रिपोर्ट दर्ज करके उसे गिरफ्तार करेगी। इसके अलावा शादी होते हुए किसी अन्य महिला के साथ रहना भी अपराध है।
परिवार को मिलने वाले असलहे खटाई में पडे़
चंद्रमोहन की मौत के बाद उनके कई रिश्तेदारों द्वारा असहले की पेशकश की थी। जिस पर पुलिस ने काफी हद तक कार्रवाई भी कर दी थी और फाइल डीएम के पास पहुंचने पर शस्त्र लाईसेंस दे दिए जाते। लेकिन उससे पहले ही प्रकरण खुल गया और अब लाइसेंस भी खटाई में पड़ गए हैं।
चंद्रमोहन की मौत के प्रकरण में कासना गांव के वह पांच लोग हत्यारोपी बनाए गए थे। जिनसे चंद्रमोहन और उनके ससुरालियों का जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। चंद्रमोहन के जिंदा होने की जानकारी मिलने के बाद वह परिवार काफी खुश है।
आरोपी बने लोगों के परिजन राजेश बैरागी का कहना है कि उन्हें भगवान पर विश्वास था और बस अधिकारियों से न्याय की उम्मीद थी। उनका कहना है कि भगवान के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं है। चंद्रमोहन ने षड़यंत्र रचकर उनके रिश्तेदारों को हत्यारा बना दिया था लेकिन अब वह स्वयं ही हत्यारोपी बन गया है।
नितिन रोहिल्ला कांड पर भी उठने लगे सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रमोहन के जिंदा होने के खुलासे के बाद अब नितिन रोहिल्ला कांड पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने इसे हादसा मान फाइल बंद कर दी थी, लेकिन अब इस मामले की दोबारा जांच की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस मामले की गंभीरता से जांच जरूरी हो गई है।
नितिन रोहिल्ला कांड में भी कई पेंच हैं इसलिए पुलिस दोबारा इसकी जांच करेगी। कासना पुलिस नोएडा पुलिस से संपर्क साधकर मोबाइल कॉल डिटेल पर काम करने के लिए मदद मांगी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नितिन रोहिल्ला कांड में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अभी तक नहीं मिला है। जैसे नितिन नोएडा से इतनी दूर ही आत्महत्या करने क्यों आया। नितिन को अगर खुदकुशी करनी ही थी तो वह दूसरे तरीके भी अपना सकता था। घर में भी खुदकुशी कर सकता था।
नितिन कई दिन तक इधर-उधर घूमता रहा था। सवाल ये भी है कि जब कार जली तो उसमें धमाका क्यों हुआ। चंद्रमोहन के जिंदा होने की खबर के बाद पुलिस नितिन कांड को लेकर काफी सतर्क हो गई है। इसमें उठे सवाल दोबारा जांच के लिए प्रेरित कर रहे हैं।