दिल्ली सरकार के व्यापार और कर विभाग के बैंक खातों और लॉगइन-पासवर्ड को हैक कर 262 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा हुआ है। आरोपी के बैंक स्टेटमेंट में टैक्स की रकम जमा दिखा दी गई, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं किया गया। दिल्ली सरकार ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को दी है। दिल्ली पुलिस ने इसकी पुष्टि की है।
उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को बताया कि विभाग को इसकी शिकायत करीब तीन महीने पहले मिली थी। इसके आधार पर विभाग ने बैंक के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच की। इसमें पता चला कि करदाता जो पैसा जमा कराता, वह सरकारी खाते तक नहीं पहुंच पाता। हालांकि करदाता के बैंक खातों में इसकी एंट्री हो जाती थी। यह हेरफेर करीब छह साल से चल रहा था।
सिसोदिया ने इसमें विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका से भी इंकार नहीं किया। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का दावा किया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामला साइबर क्राइम से जुड़ा है। आरोपियों ने विभाग के 27 बैंक खातों में से 13 और लॉगइन व पासवर्ड हैक कर लिए थे। इसकी मदद से वह बैंक और करदाताओं के खातों में बिना रकम जमा हुए एंट्री कर देते थे। सभी भुगतान वैट विभाग के पंजीकृत डीलरों के जरिए होता था।
शक के दायरे में 8760 व्यापारी
अधिकारी बताते हैं कि बीते छह साल में इस तरह के फर्जी लेनदेन में 8760 व्यापारियों पर शक है। पूरे मामले में करीब 262 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि आंकड़े शुरुआती जांच के हैं। संभव है कि मामला ज्यादा बड़ा हो। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।