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दिल्ली कोचिंग सेंटर हादसा: बेसमेंट के चार सह-मालिकों को नहीं मिली जमानत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 23 Aug 2024 06:09 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत ने राजेंद्र नगर में बेसमेंट में पानी भरने से आईएएस की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत मामले में चार सह-मालिकों को जमानत देने से इनकार कर दिया। हाल ही में ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में एसयूवी ड्राइवर और पेशे से व्यवसायी मनोज कथूरिया को जमानत दी थी।
 
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delhi coaching centre - फोटो : पीटीआई
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अदालत ने राजेंद्र नगर में बेसमेंट में पानी भरने से आईएएस की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत मामले में चार सह-मालिकों को जमानत देने से इनकार कर दिया। राउज एवेन्यू कोर्ट की प्रधान एचं जिला एवं सेशन जज अंजू बजाज चांदना ने परविंदर सिंह, हरविंदर सिंह, सरबजीत सिंह और तजिंदर सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया। हाल ही में ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में एसयूवी ड्राइवर और पेशे से व्यवसायी मनोज कथूरिया को जमानत दी थी।

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राउ के आईएएस कोचिंग सेंटर के बाढ़ग्रस्त बेसमेंट में तीनों उम्मीदवारों की मौत हो गई थी। संस्थान बेसमेंट में अवैध रूप से लाइब्रेरी चला रहा था, जहां छात्र बाढ़ में फंस गए थे।
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मौतों की जांच करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने डूबने की त्रासदी के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में कोचिंग सेंटरों के सुरक्षा अनुपालन का पता लगाने के लिए एक स्वत: संज्ञान मामला भी शुरू किया। आरोपियों पर 27 जुलाई को पुलिस स्टेशन राजिंदर नगर में दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 105, 106 (1), 115 (2), 290 और 3 (5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। 
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आरोपियों को 28 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। उच्च न्यायालय के 2 अगस्त के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने संबंधी आदेश के बाद तीस हजारी स्थित सत्र न्यायालय ने 5 अगस्त, 2024 के आदेश के माध्यम से उचित न्यायालय में जाने की स्वतंत्रता के साथ जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने 31 जुलाई, 2024 को उनके आवेदनों को खारिज कर दिया था।

आरोपियों ने इस आधार पर जमानत मांगी है कि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि आवेदक का नाम एफआईआर में नहीं था और आवेदक अन्य सह-मालिकों के साथ खुद नेकदिल बनकर पुलिस स्टेशन गए और जांच अधिकारी की हिरासत में रहे इस तथ्य के बावजूद कि आईओ ने उन्हें बुलाया तक नहीं था जो स्पष्ट रूप से आवेदकों की ईमानदारी को दर्शाता है।

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