आधी अधूरी तैयारी ने स्वास्थ्य विभाग को अपने ही अभियान से रोक दिया है। बच्चों को डायरिया से निजात दिलाने के लिए बुधवार से रोटावायरस वैक्सीन शुरू करना था, लेकिन विभाग के पास दवा ही नहीं पहुुंची।
स्वास्थ्य मुख्यालय से सभी जिलों में दवा नहीं पहुंचने के कारण फिलहाल इसे टाल दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस वैक्सीन के शुरू होने से शिशु मृत्युदर में 40 फीसदी तक कमी आएगी।
यूनीसेफ के सहयोग से केंद्र सरकार ने हरियाणा समेत हिमाचल, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में एक साल तक के बच्चों को यह वैक्सीन देने का फैसला किया है। छह उत्तरी राज्यों में डायरिया से होने वाली मौतों के मामले में हरियाणा की स्थिति सबसे खराब है।
इसके लिए सभी जिलों में एक साथ यह शुरू करना था। लेकिन अभी तक दवा सभी जिलों में नहीं पहुंची। जिसकी वजह से बुधवार को इसे शुरू नहीं किया जा सका। अब फिर से सभी जिले के डॉक्टरों की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है।
सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ का कहना है कि स्वास्थ्य मुख्यालय द्वारा फिलहाल इसे स्थगित कर दिया गया है। अब अगली तारीख आने का इंतजार किया जाएगा। डॉक्टरों की ट्रेनिंग चंडीगढ़ में बुलाई गई है।
यह होगा बच्चे की खुराक का शेड्यूल
जन्म पर : बीसीजी, ओपीवी-एचईपीबी
6वें हफ्ते : ओपीवी-1, पेंटावेलेंट-1, रोटा-1
10वें हफ्ते : ओपीवी-2, पेंटावेलेंट-2, रोटा-2
14वें हफ्ते : ओपीवी-3, पेंटावेलेंट-3, रोटा-3
9वें महीने : एमसीवी-3, जेई-1
24 महीने तक: डीपीटी-बी1, ओपीवी-बी, एमसीवी-2, जेई-2