रमजान के मुबारक महीने में रोजेदारों के बीच खाड़ी देशों की खजूर की मांग बढ़ गई है। इन दिनों बाजार में खाड़ी देशों से आने वाली खजूर की कई किस्में मौजूद है।
जो रोजेदारों द्वारा ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले इसके दाम में करीब 20 फीसदी इजाफा हुआ है। इसके लिए बावजूद इनकी मांग बरकरार है।
मुस्लिम समाज के बेहद महत्वपूर्ण रमजान के महीने में हर मुस्लिम परिवार में खजूर का महत्व है। दुकानदारों की मानें तो रमजान के महीने में लगभग एक परिवार में तीन से पांच किलो खजूर की खपत है।
इस कारण रमजान में शहर में खजूर की खपत बढ़ गई है। इसे सुन्नत के साथ जोड़कर भी देखा जाता है। रमजान के दौरान दिनभर रोजा रखने के बाद शरीर की पोषक तत्वों की कमी खजूर खाकर पूरा किया जाता है।
शहर के बाजार में आम से लेकर खास खजूर मौजूद है। सउदी के बसरा और तारीफ से आने वाली खजूर बेहद उम्दा है। आम खजूर से महंगा होने के बावजूद इसकी मांग है।
ढाई सौ से छह सौ रुपये किलो खुदरा बाजार में मिल रहा है। इसमें बरारी, डेडकान, लायन, क्राउन, बुमान, किंग वगैरह नाम से मौजूद है। दुकानदार मोहम्मद तौहीर कहते हैं कि सबसे अच्छी क्वालिटी डेडकान और किंग की होती है। आम खजूर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु व राजस्थान से भी आते हैं। यह खजूर 160 से 420 रुपये किलो मौजूद है।
खजूर के फायदे
पारस अस्पताल की डाइटिशियन राशि चहल कहती हैं कि खजूर में कार्बोहाइड्रेटस, कैल्शियम और मैग्नेशियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक अकेले खजूर में 23 कैलोरी होती है तथा कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल भी नहीं होता। इसमें 65-80 फीसदी तक ग्लूकोज होता है।
खजूर में कई तरह के स्वास्थ्य वर्धक गुण छुपे हैं। भूखे रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी और ब्लड प्रेशर लो हो जाता है। खजूर पूरा करने में सक्षम है। लीवर के हानिकारक जीवाणुओं को भी खजूर नष्ट करता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी खजूर फायदेमंद है। इससे शूगर नहीं बढ़ता है।
खजूर का इस्लामिक महत्व
गुडग़ांव के जामा मस्जिद के इमाम जान मोहम्मद कहते हैं कि खजूर खाना सुन्नत माना जाता है। आखिरी नबी मोहम्मद साहब इफ्तार में खजूर खाया करते थे। उसी का पालन करते हुए तमाम मुसलमान खजूर को अफजल मानते हैं।
रमजान के दौरान दिन भर रोजा रखने के कारण शरीर में कमजोरी आ जाती है। इसके सेवन से शरीर में आई कमजोरी दूर हो जाती है। अगर कोई खजूर से रोजा खोलने में असमर्थ हो तो पानी से भी रोजा खोला जाता है।