12 मई को चुनाव खत्म हो चुके हैं और 16 मई को इसके नतीजे घोषित हो जाएंगे। इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा लैंड डील की सुनवाई 21 मई को तय की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन सभी को नियमों का उल्लंघन कर लाइसेंस प्रदान किए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायमूति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई तय थी।
मंगलवार को न्यायमूर्ति वीके जैन के अवकाश ग्रहण करने के कारण उनकी विदाई पार्टी के कारण अधिकांश मामलों की सुनवाई नहीं हो पाई।
इस लैंड डील से हरियाणा को करोड़ों का घाटा
याची अधिवक्ता एमएल शर्मा ने याचिका में तर्क रखा कि हरियाणा में 21,366 एकड़ कृषि भूमि पर रिहायशी कॉलोनी बनाने और भवन निर्माण करवाने के लिए विभिन्न भवन निर्माताओं को संवैधानिक नियमों का पालन किए बिना ही लाइसेंस दिया गया है।
उन्होंने कहा इस निर्णय से राज्य को 3.9 लाख करोड़ का राजकोषीय घाटा हुआ है। याचिका में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) शशिकांत शर्मा द्वारा तीन जून 2013 को सौंपे गए उस पत्र को खारिज करने की मांग की गई, जिसमें वाड्रा से संबंधित स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए लाइसेंस की जांच को वापस लेने का आरोप है।
विनोद राय ने दी थी इसकी जांच के आदेश
याचिका में कहा गया है कि जांच के आदेश शशिकांत शर्मा से पहले कैग अधिकारी रहे विनोद राय ने दी थी। याचिका में स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी प्राइवेट लिमिटेड और राजस्थान में इसकी शाखाओं के लिए किए गए जमीन के सौदों की भी जांच की मांग की गई है।
शर्मा ने दावा किया था कि नगर व देश योजना विभाग (डीटीसीपी) ने गुड़गांव और अन्य हिस्से में फैले 21,000 एकड़ जमीन के लिए 2005 से 2012 के बीच सैकड़ों लाइसेंस जारी किए थे।
याचिका के अनुसार हरियाणा में डीटीपीसी द्वारा कॉलोनी के लिए व्यक्ति विशेष जो कि जमीन का मालिक नहीं है, को लाइसेंस जारी करना, न केवल अवैध है बल्कि प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट 1988 के तहत भ्रष्टाचार का मामला है।