रोडवेज कर्मचारी यूनियन के छह नेताओं व सरकार के बीच हुए समझौते को हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन फरीदाबाद ने सिरे से नकार दिया है और पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसको लेकर यूनियन के कर्मचारियों ने बुधवार को बल्लभगढ़ डिपो में बैठक की, जिसमें यूनियन के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को बताया कि समझौते के अनुसार कर्मचारियों को अपनी मंजूरी शपथ पत्र पर देनी होगी, जिसके बाद ही फैसला लागू होगा। इस पर 600 कर्मचारियों ने शपथ पत्र देने से इनकार कर दिया।
कर्मचारियों का कहना है कि मांगो को लेकर पहले से ही मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके तहत अगर एक भी कर्मचारी समझौते में अपनी मंजूरी नहीं देता, तो केस रद्द नहीं होगा, जिसके आधार पर कर्मचारियों ने समझौते को मानने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, वर्ष 2003 में प्रदेश सरकार ने एक पॉलिसी बनाई थी कि रोडवेज कर्मचारियों को पहले तीन साल कच्चा कर्मचारी रखा जाए। इसके दो साल बाद नियुक्त किए गए पद से निचले पद पर रखा जाएगा। जो कर्मचारी इस नियम को पूरा कर लेगा, उसे पक्का कर दिया जाएगा।
2011 में इसके खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस पर 2013 में फैसला आया कि यह पॉलिसी गलत है। इस फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है।
यूनियन के प्रेस सचिव राम आसरे ने बताया कि इस समझौते के लागू हो जाने से कर्मचारियों के हक के 322 करोड़ रुपये सरकार की झोली में गए हैं। इस कारण कर्मचारियों में रोष है। सुप्रीम कोर्ट में इस समझौते को चुनौती दी जाएगी, जिससे सरकार को इस समझौते की मंजूरी न देने की बात कही जाएगी।