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सड़क किनारे का जूस पीते हैं, तो जरूर पढ़ें

Fri, 13 Jun 2014 07:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में गन्ने के जूस की दुकानों और कटे हुए फल बेचने वालों की दुकानों की बाढ़ आ जाती है। गर्मी से परेशान लोगों को इस मौसम में अपना गला तर करने के लिए खुले में बिकने वाले ऐसे पेय पदार्थों से भी परहेज नहीं होता।
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लेकिन ऐसे पेय आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकते हैं। सड़क किनारे खुले में बिकने वाला जूस आप पी रहे हों तो संभल जाएं। ये आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

सड़कों के किनारे गन्ने, आम, बेल गिरी आदि के जूस की अधिकांश दुकानों पर साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। सबसे ज्यादा दिक्कत गन्ने की दुकानों पर है। जिसके कारण मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं, कई बार तो गन्ने के साथ पिस भी जाती हैं। साथ ही कई दुकानदार गन्ने को ठीक से साफ भी नहीं करते और मिट्टी लगे गन्ने का ही जूस निकाल देते हैं।
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जानकारों का मानना है कि लाल धारी वाला गन्ना खराब होता है, लेकिन सस्ते के चक्कर में दुकानदार इसे ले आते हैं। रस को ठंडा करने के लिए घटिया बर्फ इस्तेमाल करते हैं। इस तरह की दुकानों से जूस पीने वाले लोग बीमार पड़ रहे हैं।

सस्ती बर्फ का करते हैं प्रयोग
गन्ने के रस और अन्य जूस में बर्फ का इस्तेमाल होता है। दुकानदार सस्ते के चक्कर में सबसे घटिया बर्फ लेकर आते हैं, जिसकी कीमत 300 से 400 रुपये सिल्ली है। वहीं, मिनरल वाटर से बनी बेहतरीन बर्फ की सिल्ली की कीमत 600 रुपये तक है। घटिया बर्फ मिले जूस पीने से आंतों में सूजन का खतरा रहता है।

फ्लेवर का कर रहे इस्तेमाल
मैंगो शेक, बेलगिरी सहित अन्य जूस और शर्बत में कई दुकानदार फ्लेवर का इस्तेमाल कर रहे हैं। फलों के महंगे होने और अधिक बचत के लालच में विक्रेता ऐसा कर रहे हैं। जहां सौ रुपये के फ्लेवर में करीब सौ ग्लास जूस बन जाते हैं वहीं सौ रुपये के बेल में मुश्किल से दस ग्लास बन पाते हैं। इससे जूस पीने वालों के लीवर सहित अन्य अंग प्रभावित होते हैं।

चीनी के स्थान पर सेक्रिन का प्रयोग
जूस को मीठा करने के लिए विक्रेता चीनी के स्थान पर सेक्रिन सहित अन्य तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा शीरा और एसेंस का प्रयोग कर रहे हैं। इससे गले के अलावा पेट की बीमारियां होने का खतरा रहता है।
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