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खास खबरः कूड़े से निकाली गई मिट्टी से बनेगी सड़क, पीडब्ल्यूडी कराएगा नए मार्ग का निर्माण

Sun, 20 Dec 2020 05:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली 
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गाजीपुर में कूड़े का पहाड़... - फोटो : amar ujala
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दिल्ली में तीनों नगर निगम के अंतर्गत आने वाले भलस्वा, गाजीपुर और ओखला कूड़े के पहाड़ दिल्ली की खूबसूरती को बदरंग करने का काम करते हैं, लेकिन आने वाले दिनों में इनमें से एक गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़ा निस्तारण के दौरान निकलने वाली मिट्टी से वजीराबाद और कश्मीरी गेट के बीच नई राह निकलेगी। साथ ही ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट की ऊंचाई भी समतल हो जाएगी।

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दरअसल, पूर्वी दिल्ली नगर निगम में प्रतिदिन करीब 2500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है जिसे गाजीपुर लैंडफिल साइट पर भेजा जाता है। लैंडफिल साइट पर मशीन द्वारा बैलेस्टिक सेपरेटर से कूड़े को तीन भागों में बांटा जाता है। पहले भाग में प्लास्टिक, पॉलिथीन तथा कपड़े के अपशिष्ट निकलते हैं। दूसरे भाग में शीशा व धातु से बने पदार्थ और तीसरे भाग में अन्य छोटे पदार्थों को अलग किया जाता है। पृथक्कीकरण के बाद कुछ अपशिष्ट को ऊर्जा संयंत्र में भेजा जाता है और कुछ बचे हुए अवशेष को मिट्टी के रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है। इसी तरह का प्रयोग तीनों लैंडफिल साइट पर होता है।

 पीडीब्ल्यूडी से अनुमति मिलने का इंतजार
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कूड़े का निस्तारण करने के दौरान मशीनों से निकलने वाली मिट्टी की मात्रा भी अधिक हो जाती है। इसको देखते हुए निगम ने मिट्टी के उपयोग के लिए रास्ता ढूंढा था। इसके लिए पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से मिट्टी का इस्तेमाल हाईवे निर्माण के उपयोग में लाने की बात हुई थी, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। इसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को कश्मीरी गेट से वजीराबाद रोड तक मिट्टी से बांध बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन गत सप्ताह ही उनका संदेश मिला है जिसमें उन्होंने लोक निर्माण विभाग(पीडब्ल्यूडी) के अधिकार क्षेत्र में निर्माण कार्य होने का हवाला देते हुए प्रतिक्रिया दी है। अब पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा गया है। उम्मीद है कि पीडब्ल्यूडी का भी जवाब मिल जाएगा।
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60 लाख टन मिट्टी से ढाई किलोमीटर का बनेगा बांध
निगम के अधिकारी ने बताया कि कूड़े से निकलने वाली करीब 60 लाख टन मिट्टी से वजीराबाद से लेकर कश्मीरी गेट तक ढाई किलोमीटर का बांध बनाने की योजना है। इसके लिए मिट्टी के तल की चौड़ाई को 50 मीटर खा जाएगा, हालांकि सड़क की ऊपरी सतह करीब 30 मीटर चौड़ी रहेगी। अधिकारी ने बताया कि सड़क निर्माण करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से निर्माण एजेंसी की रहेगी। इसमें केवल निगम एजेंसी को सड़क निर्माण के लिए मिट्टी उपलब्ध कराएगा। 

वर्तमान में तय करना पड़ता है लंबा रास्ता
वर्तमान में वजीराबाद से कश्मीरी गेट जाने के लिए वाहन चालकों के पास दो रास्तों का विकल्प उपलब्ध रहता है। इसमें पहला रास्ता वजीराबाद से खजूरी होते हुए पुस्ता रोड से वाया शास्त्री पार्क कश्मीरी गेट पहुंच सकते हैं। वहीं, दूसरे विकल्प के रूप में वजीराबाद से रिंग रोड के माध्यम से सीधा कश्मीरी गेट जा सकते हैं। पुस्ता रोड से कश्मीरी गेट पहुंचने के लिए लोगों को जाम में अधिक समय लगता है जबकि वजीराबाद से सीधा कश्मीरी गेट का रास्ता बन जाने पर समय की भी बचत होगी। 

प्रतिक्रिया
निगम में क्षेत्र में कूड़े के पहाड़ को खत्म कर उससे निकलने वाले अपशिष्टों को सही प्रयोग में लाना निगम का लक्ष्य है। 
-राकेश गुप्ता, उपनिदेशक, जन संपर्क विभाग, पूर्वी दिल्ली नगर निगम

हमारा लक्ष्य है कि कूड़े के पहाड़ को खत्म कर इसे मनोहरी स्थल में परिवर्तित किया जा सके।
-योगेंद्र सिंह मान, निदेशक, उत्तरी दिल्ली नगर निगम

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तीनों निगम क्षेत्र में कूड़े की स्थिति पर एक नजर

पूर्वी दिल्ली नगर निगम
  लैंडफिल साइट-गाजीपुर लैंडफिल
-1 दिन में निकलने वाला कूड़ा- करीब 2500 मीट्रिक टन
-कूड़े के निस्तारण की लगी मशीन
-15 ट्रॉमल मशीन। इसके अलावा और भी लगाने की योजना है।
-वेस्ट प्लांट से उत्पन्न होने वाली बिजली करीब 12 मेगावाट

उत्तरी दिल्ली नगर निगम
लैंडफिल साइट- भलस्वा
निगम क्षेत्र में प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा- 4200 मीट्रिक टन
-भलस्वा लैंडफिल साइट की ऊंचाई- 61 मीटर
-कूड़ा निस्तारण के लिए करीब 15 ट्रॉमल मशीन हैं। इसके अलावा चार और मशीन लगाने की योजना है

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम
लैंडफिल साइट- ओखला
लैंडफिल साइट का क्षेत्रफल- 32 एकड़
-निस्तारण की लगाई गई मशीन- 10 ट्रॉमल मशीन।  भविष्य में और मशीन लगाने की योजना है।
-निगम क्षेत्र में निकलने वाला कूड़ा- करीब 3600 मीट्रिक टन
-बिजली उत्पादन के लिए निगम ने इंडियन ऑयल व एनटीपीसी के साथ करार किया है, जिससे प्रतिदिन 1 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह संयंत्र 2021 के अंत
तक शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए निगम अपने पास से जमीन देगा।
 
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