फुटपाथ पर चलने की नहीं जगह, सर्विस रोड और हाईवे भी असुरक्षित, निगम, हुडा और पुलिस की लापरवाही भुगत रहे लोग गौरव चौधरी फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल औद्योगिक नगर में पैदल यात्री भी सुरक्षित नहीं है। फुटपाथ की कमी या इन पर अतिक्रमण की वजह से सड़क पर चलने को मजबूर 139 लोग बीते साल हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
यह हम नहीं पुलिस का रिकार्ड बोल रहा है। स्मार्ट सिटी के मानकों में सुरक्षित यातायात, फुटपाथ और साइकिल ट्रैक का होना भी जरूरी है।
हाइवे समेत शहर की लगभग हर मुख्य सड़क इन मानकों पर खरी नहीं उतरती।
यही वजह कि पैदल चलना इन सड़कों पर जोखिम भरा साबित होता है। इससे साफ जाहिर होता है कि शहर पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक जनवरी से 31 दिसंबर 2015 तक शहर में हुई दुर्घटनाओं में 199 लोगों की मौत हुई।
इनमें 189 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल हैं। 139 मौत पैदल चलने वालों की हुई। इसके अलावा एक साइकिल सवार भी हादसे का शिकार होकर अपनी जान गंवा बैठा। रिपोर्ट में शेष 59 हादसों में मौत कार, ट्रक, दुपहिया और ऑटो से दर्शाई गई हैं।
सेक्टर-55 थाना क्षेत्र सबसे बदनामहादसों के लिहाज से सेक्टर-55 थाना सबसे बदनाम माना जा रहा है। इस थाना क्षेत्र के अंतर्गत पाली, समयपुर चुंगी, सेक्टर-56, धौज, सेक्टर-25 आदि में सड़क हादसों में 23 लोगों की जान जा चुकी है। दूसरे नंबर पर सेक्टर सात थाना क्षेत्र है जहां 21 लोग जान गंवा चुके हैं। एनआईटी का कोतवाली थाना क्षेत्र सड़क हादसों के लिहाज से कम असुरक्षित माना गया, यहां सड़क हादसों में सालभर में चार लोगों की मौत हुई।
199 - सड़क हादसों में मरने वाले पैदल राहगीरों की मौत के लिए अकेले किसी एक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रोड इंजीनियरिंग की कमी तो है ही साथ ही लोगों में जागरूकता का भी अभाव है। सड़क हादसों को कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस लगातार काम कर रही है। -राजेंद्र सिंह, ट्रैफिक इंचार्ज
पैदल चलने वालों को जब जगह ही नहीं मिलेगी तो सड़क का विकल्प अपना मजबूरी होता है। सड़क हादसों के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार नगर निगम को माना जा सकता है, क्योंकि निगम की अनदेखी से ही अतिक्रमण बढ़ रहा है और इसके साथ ही हादसे भी बढ़ रहे हैं। -एसके शर्मा,
वरिष्ठ उपाध्यक्ष, रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशनमौत सालभर में सड़क हादसों में---139
पैदल चलने तक की नहीं जगहयूं तो फरीदाबाद शहर को स्मार्ट सिटी में शामिल करने की जद्दोजहद चल रही है लेकिन नगर निगम की लापरवाही शहरवासियों की जान की दुश्मन बन रही है।
फुटपाथ पर बाजार सज गए हैं, हर जगह अवैध कब्जे और अतिक्रमण का बोलबाला है। पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथ भी अतिक्रमण से बचे नहीं है। ऐसे में सड़कों पर फर्राटा भरते वाहनों के बीच जान जोखिम में डालकर पैदल सफर करना पड़ता है।
सड़क हादसों के लिहाज से एनआईटी जोन (सूरजकुंड, एसजीएम नगर, एनआईटी, कोतवाली, सारन, मुजेसर व सेक्टर 55 थाना क्षेत्र) सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुआ है।
यहां सड़क हादसों ने 78 लोगों की जीवन लीला खत्म कर दी, जबकि दूसरे नंबर पर सेंट्रल जोन (सराय, सेक्टर 31, ओल्ड, सेंट्रल और भूपानी थाना क्षेत्र) रहा। इस जोन में 63 लोगों ने जान गंवाई। 58 सड़क हादसों के साथ बल्लभगढ़ जोन तीसरे नंबर पर रहा है।
किस थाना क्षेत्र में कितनी मौतसराय ख्वाजा17सेक्टर-3112ओल्ड फरीदाबाद10सेंट्रल18भूपानी06सूरजकुंड17एसजीएम नगर05एनआईटी07कोतवाली04सारन05मुजेसर17सेक्टर-5523सिटी बल्लभगढ़13सदर बल्लभगढ़16सेक्टर सात21तिगांव03छांयसा05