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अब वेस्ट प्लास्टिक से बनेंगे रोड डिवाइडर, स्पीड ब्रेकर व कृत्रिम छोटे नाले

Mon, 24 Sep 2018 04:55 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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West Plastics
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दूध के पैकेट, कोल्ड ड्रिंक की बोतल, खाली चिप्स के पैकेट, दवा की खाली बोतल आदि अब पर्यावरण में बाधा नहीं बनेगी। आईआईटी दिल्ली और सेना के जवान सचिन देशमुख ने स्टार्टअप में वेस्ट प्लास्टिक प्रोडक्ट मशीन की तकनीक तैयार की है। इस मशीन के माध्यम से पर्यावरण में बाधक प्लास्टिक से रोड डिवाइडर, स्पीड ब्रेकर, कृत्रिम छोटे नाले, आर्यलैंड, पेविन ब्लॉक व ट्री गार्ड (ईंट के आकार का) तक बना सकते हैं।

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आईआईटी इंडस्ट्री डे में स्वच्छ भारत अभियान पर आधारित देशमुख रिसर्च इंडस्ट्री आम लोगों द्वारा प्लास्टिक का अंधाधुंध प्रयोग और उसके नुकसान के प्रति आम लोगों को जागरूक करती है। पर्यावरण को बचाने की मुहिम में सचिन की पाटर्नर उनकी पत्नी रिया देशमुख है। 

सचिन के मुताबिक, उन्होंने पहाड़ों से लेकर समुद्र तक में नौकरी के दौरान देखा कि प्लास्टिक प्रयोग करने के बाद सड़कों, नदियों, पहाड़ों से लेकर समुद्र तक नुकसान पहुंचाते हैं। उसके चलते बरसात में नाले ब्लॉक की समस्या और समुद्री जीव भी मर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले स्वच्छता अभियान को नहीं चला सकते हैं, क्योंकि दवा, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक व दूध भी प्लास्टिक के पैकेट में आता है। इसीलिए प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए वेस्ट प्लास्टिक प्रोडक्ट मशीन की तकनीक इजाद की। 

इस मशीन की खासियत है कि यह 150 माइक्रोन से कम साइज के वेस्ट प्लास्टिक का भी निपटान कर सकती है। इसमें ऊष्णता से प्लास्टिक की अवस्था बदल रहे हैं, न की जला रहे हैं। इसलिए प्रदूषण की मात्रा बेहद कम है। यह स्मोक एल्युमिनीटर से कम किया जा सकता है।

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चल रहे हैं क्लीनिक ट्रायल

मैनुअल मशीन और सेमी-ऑटोमेशन मशीन सूखे प्लास्टिक और ऑटोमेशन मशीन सूखे और गीले प्लास्टिक पर काम करती है। इस मशीन के माध्यम से किसी भी आकार का उत्पादन किया जा सकता है। यह कचरे से प्लास्टिक को अलग कर देती है  जबकि अन्य कचरा खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। स्वच्छता मुहिम की तकनीक छह इंटरनेशनल और चार भारतीय रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हो चुकी है। आईआईटी ने इस तकनीक का पेटेंट भी करवा लिया है। 

ब्लड से मेल, फीमेल, उम्र, कैंसर सेल विकसित होने से पहले होगी जानकारी 
आईआईटी की बेटियों ने दुनिया में पहली बार स्टार्टअप में डिजिटल हॉलोग्राफिक माइक्रोस्कोप तकनीक ब्लड क्वालिटी असेसमेंट के तहत की है। खासियत है कि रक्त के नमूने से पुरुष, महिला, उम्र, हाइट के अलावा कैंसर जैसी बीमारी की शुरुआत में ही जानकारी मिल जाएगी।

प्रगति शर्मा व पूर्णिमा शर्मा के मुताबिक, माइक्रोस्कोप के साथ हम अपनी दूसरी तकनीक प्रयोग करके कैंसर के सेल की जानकारी दस से पंद्रह साल पहले दे पाएंगे। अभी तक कैंसर सेल शरीर में विकसित होने के बाद ही पता लग पाता है।

ऐसे में इलाज महंगा होने के साथ, तकलीफ व मरीज के बचने के चांस कम रहते हैं। इस तकनीक के माध्यम से यदि रक्त में एक भी कैंसर का सेल होगा तो उसकी पहचान कर लेंगे। दुनियाभर में इस तकनीक पर फिलहाल काम हो रहा है, लेकिन हमें सफलता मिल चुकी है। इसके क्लीनिक ट्रायल चल रहे हैं और उसके बाद हम पेटेंट करा लेंगे। 
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पांच सेकेंड में दूध की मिलावट की घर बैठे जांच 

आईआईटी के पूर्व छात्रों ने स्टार्टअप में टेस्ट राइट पाकेट लैब बनाई है। इस तकनीक को प्रिज्म का नाम दिया गया है। इसके माध्यम से चार सेकेंड में दूध की मिलावट की जानकारी मोबाइल पर मिल जाएगी। शुभ राठौर  के मुताबिक, दूध में यूरिया व डिटर्जेंट मिलाया जाता है। 

प्रिज्म डिवाइस में आधा चम्मच दूध डालते ही मोबाइल ऐप पर दूध में किस प्रकार की मिलावट की गई है, उसका पता लग जाएगा। टीम ने अपनी तकनीक को पेटेंट करवा लिया है। आम लोगों को यह तकनीक ढाई हजार रुपये में दिवाली तक उपलब्ध होगी। दरअसल टीम दिवाली पर दूध की मांग बढ़ने के दौरान ही इसे मार्केट में उतारेगी। इसके अलावा टीम ने पेट्रोल व डीजल जांच की डिवाइस भी बनाई है।

मसल्स की दिक्कत भी अब दूर होगी 
लाइफस्टाइल में बदलाव के चलते इन दिनों अधिकतर लोगों को पीठ, गर्दन, बाजू, टांग आदि की मसल्स में दिक्कत रहती है। आईआईटी के इन दिक्कतों को दूर करने में कई तकनीक स्टार्टअप में इजाद की हैं। हर्ष लाल ने ड्राइविंग, कुर्सी पर ज्यादा देर बैठने वालों के लिए पीठ पर बांधने वाली वेल्ट तैयार की है, जिसमें अंदर लगे डिवाइस मसल की मसाज करते हैं।

इससे ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। इसके अलावा टेक्सटाइल डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों ने फैब्रिक मसाजर बनाया है, जोकि मोबाइल ऐप के माध्यम से चलता है। वहीं साहिल, पार्थ की टीम ने सिलीकान के प्रयोग से ऐसी चिप बनाई है, जोकि चार घंटे प्रयोग से दो सौ फीसदी पीठ दर्द ठीक करने का दावा कर रहे है। फिलहाल क्लीनिक ट्रायल जारी है। महज दो से तीन हजार की रेंज में आम लोगों को यह डिवाइस जल्द ही मार्केट में उपलब्ध होंगी।
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