नोएडा में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं, क्योंकि जिला पुलिस के ताजा आंकड़ों ने इन दावों की हवा निकालकर रख दी है।
आंकड़ों के मुताबिक कदम-कदम पर हादसों का खतरा मंडरा रहा है। सड़क हादसों के ग्राफ ने पिछले कई साल के रिकॉर्ड तोड़ते हुए ऊंची छलांग लगाई है।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। दिल्ली की तर्ज पर नोएडा में ट्रैफिक नियमों का पालन कराने के लिए साल भर में करीब 72 हजार चालान काटे गए और एक करोड़ का जुर्माना वसूला गया, लेकिन इसका नतीजा सिफर दिखाई दे रहा है।
हाल ही में तैयार की गई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। सुधार के तमाम प्रयासों के बावजूद सड़क हादसों में कमी तो नहीं आई बल्कि हादसों ने पिछले कई साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
वर्ष 2006 में जिले में हुए सड़क हादसों की संख्या 626 दर्ज की गई थी, जबकि साल 2013 में यह आंकड़ा 874 पर पहुंच गया है।
ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए इस बीच अंडरपास, फ्लाईओवर और डिवाइडरों का निर्माण भी किया गया, फिर भी हालात जस के तस बने हुए हैं। रिपोर्ट अधिकतम दुर्घटनाओं व अधिकतम मृतकों के आधार पर सड़कों के टॉप टेन ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं।
सबसे खतरनाक चौराहा
रिपोर्ट में सेक्टर-63 चौराहे को सबसे खतरनाक माना गया है। सेक्टर-58 थाने के अंतर्गत आने वाले इस चौराहे पर बीते साल 13 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिनमें छह लोगों ने अपनी जान गंवाई और 13 घायल हुए।
यहां हुई सबसे ज्यादा मौत
पुलिस की रिपोर्ट पर गौर करें तो नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा जानें गईं। वर्ष 2013 में ग्रेनो थाना क्षेत्र के बादौली गांव के निकट पांच सड़क दुर्घटनाओं में आठ लोगों की जान गई ओर 2 घायल हुए।
यहां भी मंडरा रहा खतरा
ग्राम बादौली (एक्सप्रेसवे), धुममानिक पुर (बादलपुर), मंडी श्यामनगर (दनकौर), देवला (सूरजपुर), जैन अस्पताल चौराहा (जेवर) आदि।
सड़कों पर संसाधन
फिलहाल जिले की सड़कों पर 65 पीसीआर 24 घंटे गश्त करती हैं। एक्सप्रेसवे पर दो एंबुलेंस, दो क्रेन और चार मोबाइल पेट्रोलिंग वैन निगरानी कर रही हैं।
नहीं उठाए गए कदम
वर्ष 2012 में सड़क सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट में ऐसे दस स्थानों की पहचान की गई थी, जहां एंबुलेंस तैनात रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके अलावा आठ स्थान ऐसे चयनित किए गए थे जहां सहायता के लिए हर समय क्रेन तैनात की जानी थी, लेकिन कोई ज्यादा फर्क नहीं दिखा।
साल दर साल बढ़ रहे हादसे
वर्ष------दुर्घटनाएं----मृतक----घायल
2006------626------286------485
2007------694------353------480
2008------704------347------528
2009------762------383------602
2010------725------558------533
2011------843------362------597
2012------868------407------579
2013------874------384------663
(पुलिस की रिपोर्ट पर आधारित आंकडे़)