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अगर घर में लगा रखा है आरओ तो मुश्किल में पड़ सकते हैं आप

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अगर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश पर अमल हुआ तो गुड़गांव के लोगों को प्यासे रहना होगा या अपनी प्यास बुझाने के लिए दूषित हो चुकी पानी पीने को मजबूर होना होगा।
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साइबर सिटी के अमूमन घरों में आरओ सिस्टम के जरिए पानी को फिल्टर कर पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

बता दें कि एनजीओ फ्रेंड्स की ओर से एनजीटी में दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए आरओ पर प्रतिबंध लगाने का विचार कर रही है।

दरअसल, दूषित हो चुके गुड़गांव के पानी की वजह से यहां के लोगों के लिए आरओ जरूरी ही नहीं, मजबूरी भी है। हरियाणा शहरी विकास प्रधिकरण द्वारा अपने सेक्टरों और नगर निगम द्वारा अपनी कॉलोनियों में नहरी पानी को ट्रीटमेंट करके सप्लाई की जाती है।

साइबर सिटी का पानी है जानलेवा

इसके बावजूद पानी में दूषित तत्व मौजूद रहते है। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में लोगों ने अपनी समझ के अनुरूप आरओ व्यवस्था कर रखा है।

‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट’ (सीएसई) ने अपने हालिया रिपोर्ट में बताया था साइबर सिटी में पीने का पानी लायक नहीं है। करीब 40 फीसदी पीने और खाना पकाने के पानी में फ्लूराइड, क्लोरिन और टीडीएस (जरूरी खनिज व नमक) की मात्रा अधिक है।

आदर्श तौर पर टीडीएस की मात्रा 500 से 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए, लेकिन साइबर सिटी के पानी में 7000 मिलीग्राम प्रति लीटर पार कर चुका है। जो यहां के लोगों के सेहत के नजरिए से नुकसानदेह है।

संबंधित निकायों द्वारा ट्रीटेड पानी सप्लाई के लिए बावजूद अधिक मात्रा में फ्लूराइड, क्लोरिन आना चिंता का विषय है। सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आरओ केवल अधिक मात्रा में मौजूद टीडीएस को कम करने के साथ मौजूद खनिज पदार्थों को भी खत्म कर देती है। लेकिन, कुछ दूषित तत्व इसमें बचे रहते है।
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इस पानी से बढ़ रही है कई समस्याएं

भूजल वैज्ञानिक वीएस लांबा कहते है पानी को दूषित होने से बचाने के लिए सीवरेज और नहरों को दूषित होने से बचाना होगा। तभी शुद्ध पानी मिल सकता है।

सिविल अस्पताल के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. सुमित मलिक कहते है पीने के पानी में फ्लोराइड और क्लोरिन की वजह से फ्लोरोसिस नामक बीमारी हो रही है। जिसमें दांत चित्तेदार हो जाता है।

लंबे समय तक इसके प्रयोग से दांत टूटने या सड़ने की समस्या भी आती है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रदीप शर्मा कहते है पेट, किडनी, चमड़े कई तरह की बीमारियों के लिए पानी ही जिम्मेवार है।
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