हाल ही में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान को बेहतर बनाने के लिए रिवर्स ओसमोसिस ट्रीटेड (आरओ) के पानी (शोधित पेय जल) से छिड़काव किया गया वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन (टीपीडीडीएल) ने 31 शैक्षणिक संस्थाओं में आरओ सिस्टम लगाकर भू-जल को बर्बाद किया जा रहा है।
यह आरोप नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल एक याचिका में लगाया गया है। याची का आरोप है कि दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) ने इस काम को अंजाम दिया है। वहीं बेंच ने याचिका पर विचार के बाद प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने बुधवार को गैर सरकारी संस्थान फ्रेंड्स की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की।
बेंच ने मामले में दिल्ली जल बोर्ड, डीडीसीए और टीपीडीडीएल से जवाब मांगा है। याची का आरोप है कि 31 शैक्षणिक संस्थाओं में लगाए गए आरओ सिस्टम के जरिये प्रति घंटे 750 लीटर पानी निकलता है। सभी सिस्टम भू-जल का दोहन करते हैं। इससे बड़े पैमाने पर भू-जल की बर्बादी हो रही है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। फ्रेंड्स की ओर से दाखिल याचिका में आरोपों का आधार मीडिया रिपोर्ट्स को बनाया गया है।