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Rithala Fire: हादसे के बीते 10 दिन, अब तक नहीं मिले शव; पुलिस जान गंवाने वालों के शव नहीं सौंप सकी परिजनों को

Fri, 04 Jul 2025 07:32 AM IST
विजय पुंडीर शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हादसे में जान गंवाने वाले दिलीप सिंह (62) के घर में पिछले 10 दिनों से चूल्हा नहीं जला है। लगातार उनके पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहां से खाना भेजा जा रहा है। दिलीप सिंह की बुजुर्ग पत्नी सुमित्रा की आंखें रो-रोकर सूख चुकी हैं।
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Delhi Factory Fire - फोटो : ANI
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विस्तार
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रिठाला में 24 जून को चार मंजिला प्लास्टिक बैग, टिशू पेपर और रूम फ्रेशनर स्प्रे बनाने वाली फैक्टरी में आग लगने की घटना को 10 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस हादसे में जान गंवाने वाले चार लोगों के शव परिजनों के हवाले नहीं कर पाई है। चारों शव अब भी बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल के मुर्दा घर में पड़े हैं। पुलिस भी पिछले 10 दिनों से परिजनों को टालती आ रही है। बृहस्पतिवार सुबह चारों लोगों के परिजनों को अस्पताल बुलाया गया लेकिन डीएनए रिपोर्ट नहीं आने की बात कहकर फिर लौटा दिया गया। अब शुक्रवार को फिर बुलाया है।

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हादसे में जान गंवाने वाले दिलीप सिंह (62) के घर में पिछले 10 दिनों से चूल्हा नहीं जला है। लगातार उनके पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहां से खाना भेजा जा रहा है। दिलीप सिंह की बुजुर्ग पत्नी सुमित्रा की आंखें रो-रोकर सूख चुकी हैं। मोर्चरी में दिलीप सिंह का बेटा धर्म सिंह पुलिस कर्मियों की मिन्नतें कर शव दिलवाने की गुहार लगा रहा था।

धर्म सिंह ने बताया कि पिता की मौत के बाद से घर में कोई ठीक से सोया भी नहीं है। उनके तमाम रिश्तेदार घर में मौजूद हैं। धर्म सिंह नोएडा की एक निजी कंपनी में सीनियर प्रोसेस एक्सपर्ट हैं। पिता की मौत के बाद से वह दफ्तर नहीं जा पाए हैं। छोटा भाई सौरव और उसकी पत्नी भी दफ्तर से छुट्टी लेकर घर पर हैं।
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धर्म सिंह ने बताया कि जब तक वह पिता के शव का अंतिम संस्कार कर घर में पूजा पाठ नहीं करेंगे। उनके यहां खाना बनाने के लिए चूल्हा नहीं जल सकता है। इस वजह से रिश्तेदारों व पड़ोसियों के घर से उनके यहां खाना आ रहा है। बुधवार को पुलिस ने पहचान हो जाने पर शव का पोस्टमार्टम भी करवा दिया, लेकिन शव नहीं सौंपा।

पुलिस डीएनए रिपोर्ट आने के बाद शव देने की बात कह रही है। हादसे के बाद से रिठाला की रहने वाली नीलम देवी, ललिता और एक फैक्टरी मालिक राकेश अरोड़ा भी गायब हैं। उनके परिजन भी अस्पताल और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मामले पर रोहिणी जिला के पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

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