मुंबई जाकर अगर आप किसी फिल्म की डेब्यू ऋषि कपूर जैसे अदाकार के साथ कर रहे होते हैं तो यह अपने आप में बड़ी बात तो है ही, रोमांचक भी काफी रहता है। ‘मुल्क ’मेरी पहली फिल्म है। इसमें ऋषि जी के साथ काम करना मेरे लिए बड़ा अनुभव था। शूट का पहला दिन भी उन्हीं के साथ था।
जब मैं सेट पर पहुंची तो बहुत डरी हुई थी। क्योंकि सब जैसा जानते हैं कि वह बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते हैं। नाराज हो जाते हैं। लेकिन मिलने पर सारा डर काफूर हो गया। सामने पड़ते ही पहले उन्होंने मुझे हाय बोला और पूरा परिचय लिया, नाम पूछा। उसके बाद ऐसा घुल मिल गए कि लगा नहीं कि अभी-अभी की मुलाकात है।
बाद के 26 दिन, जब तक मैं उनके साथ रही, कभी लगा नहीं कि मैं पहली बार उनके साथ काम कर रही हूं या मैं बहुत नई हूं इंडस्ट्री में। उन्होंने एकदम से बच्चे की तरह मेरे साथ व्यवहार किया। सिखाया, समझाया, हर एक चरित्र को डीप में बताया कि इसे वास्तविक अंदाज में कैसे करना है।
मेरा और उनका एक रोने का सीन था जिसमें शायद उन्होंने अगर मेरी मदद नहीं की होती तो मैं उतनी बेहतरीन तरीके से न कर पाती। इस काम से खुश होकर उन्होंने मुझे अपनी पुस्तक 'खुल्लम खुल्ला' गिफ्ट की। साथ ही कहा भी, 'वर्तिका, तुम एक बेहतरीन अदाकारा हो। तभी यह तोहफा मैं तुमको अपनी तरफ से दे रहा हूं।'
उनकी यह लाइन, वो पल मेरी जिंदगी का अभी तक सबसे बेहतरीन पल है। क्योंकि एक महान अभिनेता से यह सुनना कि आपका काम उनको पसंद आया और इस चीज के लिए तोहफा देना, यह बड़ी बात थी मेरे लिए। इसे देखकर मैं भावुक हो गई थी। और जब भी उस पल को सोचती हूं कि खुशी से मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज सुबह जब उनके निधन की खबर मिली, एकबारगी यकीन नहीं हुआ।
उनके साथ बिताया हर पल आंखों के सामने घूम गया। बार-बार मुल्क के सेट की बातें, उनकी चुहलबाजियां याद आ रही थीं। मोबाइल में कैद तस्वीरों को देखती रही। तभी एक तस्वीर आई, जिसे मैंने एक खास मकसद से क्लिक किया था। असल में फुर्सत के वक्त हम सब बैठे थे। तभी हमने उनसे कहा, 'सर, कुछ अलग करते हैं।' मेरी बात पूरी होने से पहले उन्होंने आंख मारी और कहा, 'बेटा इसे क्लिक कर ले, यह मेरा फिल्टर है।'
तो वो जो चीजें, उनका औरा जो था वो बहुत याद आएगा। इस चीज के लिए मुझे हमेशा बहुत दुख रहेगा है कि आगे उनके साथ काम नहीं कर सकी। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। उनका काम के प्रति समर्पण, 16-17 घंटे तक लगातार शूट करना, जबकि उस वक्त भी बीमार थे, बावजूद उनकी वजह से शूटिंग कभी नहीं रुकी। ईश्वर से यही दुआ करूंगी कि वो जहां भी हों, पीस में हों। ‘मुल्क’ की यादें मेरे साथ लाइफ टाइम रहेंगी।
(जैसा कि वर्तिका सिंह ने संतोष कुमार को बताया)