पूर्व भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि भाजपा के वे सभी सदस्य जो सांसद चुने गए है, वे इस्तीफा नहीं देंगे।
लिहाजा दिल्ली विधानसभा में बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किए गए डॉ. हर्षवर्धन अब दिल्ली में सरकार बनती है या चुनाव होते है तो मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं बनाए जाएंगे।
इसी तरह अब उन अटकलों पर भी विराम लग गया है जिसमें दिल्ली के सांसद मुख्यमंत्री बनने का सोच रहे थे।
दिल्ली की राजनीति से हर्षवर्धन की विदाई
मोदी सरकार में केंद्र की राजनीति से प्रदेश की राजनीति में आना कठिन होगा। पार्टी ने यह तय किया है कि कोई भी सांसद अपने पद से इस्तीफा नहीं देगा।
ऐसे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का भी दिल्ली की राजनीति में वापस आना अब मुश्किल हो गया है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि केंद्र की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. हर्षवर्धन अब लोकल पॉलिटिक्स में नहीं जा सकेंगे।
नये सीएम कैंडिडेट का नाम भी तय
गडकरी ने जोड़तोड़ कर दिल्ली में सरकार बनाने पर भी पूर्ण विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि हम जोड़तोड़ कर दिल्ली में सरकार नहीं बनाएंगे। उन्होंने उस आरोप को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि आम आदमी पार्टी को भाजपा तोड़ने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह निराधार बातें है, जिसमें कहा जा रहा है कि अधिकारिक तौर पर मैं कांग्रेस के विधायकों से मिला हूं।
उन्होंने कहा कि अगले तीन-चार दिनों मे पार्टी दिल्ली के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा के साथ ही विधायक दल के नेता के नाम का भी ऐलान कर देगी। उन्होंने कहा कि दोनों नाम पर कोई भी मतभेद नहीं है। दो घंटे में पार्टी नाम को तय कर लेगी।