फरीदाबाद में गर्मी का असर बाजार पर दिखने लगा है। सब्जियों के खुदरा बाजार में महंगाई की आग लग गई है, जबकि थोक मंडी में हालात अभी नियंत्रण में है। ऐसे में अगर सस्ती सब्जी खरीदनी है तो आपके लिए थोक मंडियों का रुख करना बेहतर होगा, क्योंकि मंडियों में खुदरा बाजार से भी आधी कीमत पर सब्जी मिल जाएगी।
आढ़तियों का कहना है कि फिलहाल मंडियों में सब्जियों की आवक पर थोड़ा बहुत असर पड़ा है, जबकि खुदरा बाजार में गर्मी का हवाला देकर सब्जियां महंगी कर दी गई हैं। बल्लभगढ़ और डबुआ सब्जी मंडी में जहां कीमत में कोई ज्यादा फर्क नहीं है। वहीं, शहर में कदम-कदम की दूरी पर सब्जियों के खुदरा बाजार में कीमती में अच्छा-खासा अंतर देखा जा सकता है।
तीन गुना तक बढ़ा दिए रेट
गली-मोहल्ले में रेहड़ी पर सब्जी बेचने वालों और फुटकर बाजार में दुकान लगाने वालों ने थोक मंडी की अपेक्षा तीन गुना ज्यादा तक रेट बढ़ा दिए हैं। जिस सब्जी का मंडी में थोक का रेट 10 रुपये प्रति किलो है। वही फुटकर में 25-30 रुपये बेची जा रही है। हालांकि, फुटकर विक्रेता गर्मी का हवाला दे रहे हैं। वहीं, आढ़तियों का कहना है कि सेक्टर और पॉश कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मंडी के रेट नहीं पता होते, जिसके कारण वह रेहड़ी वालों से बिना मोलभाव किए ही सब्जी ले लते हैं।
इधर दाल के दाम भी आसमान पर
सब्जियों के साथ दलहन की कीमतों में भी भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। इसकी वजह कमजोर फसल को बताया जा रहा है। दालों की बढ़ी कीमत ने रसोई का बजट बिगाड़कर रख दिया है। सब्जियां महंगी होने पर दाल से काम चला लिया जाता था, लेकिन फुटकर बाजार में सब्जियों के दाम बढ़ने के साथ ही दालों ने भी धोखा दे दिया है। रसोई का बजट संभाले रखने के लिए अब कॉस्ट कटिंग का सहारा लिया जा रहा है। एक सप्ताह में दालों के रेट भी आसमान पर पहुंच गए हैं। अरहर की दाल में 20-25 रुपये की तेजी आई है। वहीं, उड़द ने में 15 से 18 रुपये का इजाफा दर्ज किया जा रहा है।
कुछ बनाने से पहले सोचना पड़ता है कि क्या बनाया जाए, क्योंकि महंगाई ने एक बार फिर रसोई के बजट को बिगाड़ दिया है। सब्जियों के दाम काफी महंगे हो गए हैं।-गीता खत्री, निवासी एनआईटी पांच
दाल और सब्जी ने रसोई का बजट बिगाड़कर रख दिया है। आलू और भिंडी के दाम काफी तेजी आई है। पिछले दिनों में भिंडी के रेट में 30 रुपये की तेजी आई है जबकि टमाटर मंडी में सस्ता होने के बावजूद 30 से 35 रुपये बिक रहा है।-सविता, निवासी एनआईटी- पांच
घर में हर सदस्य के हिसाब से खाना बनाना पड़ता हैं, लेकिन सब्जियों के रेट काफी महंगे हैं, इसलिए बजट बिगड़ गया है। रेहड़ी वाले औने-पौने दामों पर सब्जी बेचते हैं। जब मंडी में नहीं जा पाते तो मजबूरी में इन्हीं से सब्जी खरीदनी पड़ती है।-सोनिया, निवासी एनआटी -तीन
सब्जियां सस्ती होने का नाम नहीं ले रही है और दाल भी महंगी हो गई है। महिलाओं के सामने समस्या खड़ी हो गई है कि क्या बनाया जाए। आलू और टमाटर तो सब्जी में सबसे ज्यादा बिकते हैं, लेकिन इनके दाम भी काफी महंगे हैं।-अन्नू, निवासी एनआईटी -तीन
सब्जी के रेट थोक सब्जी के रेट खुदरा
आलू- 50-60 (पांच किलो) 20- 25 रुपये प्रति किलो
टमाटर 40 रुपये (पांच किलो) 30-35 रुपये किलो
लौकी 10 रुपये किलो 20-25 रुपये किलो
बैंगन 10 रुपये किलो 25 रुपये किलो
भिंडी 40-50 प्रति किलो 80 रुपये प्रति किलो
नींबू 80-100 रुपये किलो 120-150 रुपये किलो
खीरा 10 रुपये प्रति किलो 30 रुपये किलो
शिमला मिर्च 15-20 रुपये किलो 50- रुपये किलो
धनियां 10 रुपये की पांच गड्डी 5 रुपये की एक गड्डी
प्याज 10-25 रुपये किलो 30 से 40 रुपये किलो
दाल पहले अब
अरहल की दाल 130 150
उड़द छिलका 130 148
चने की दाल 60 72
मूंग धुली 90 110
चना हरे 70 90
छोले 72 96