अदालत ने राजधानी में बढ़ते दुष्कर्म के फर्जी मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में दुष्कर्म को सबसे ज्यादा नफरत के अपराध के रूप में देखा जाता है और इसमें लिप्त व्यक्ति का समाज से बहिष्कार किया जाता है।
इतना ही नहीं, यह जानते हुए कि संबंधित व्यक्ति को दुष्कर्म के फर्जी मामले में फंसाया गया है फिर भी उसे घृणा की दृष्टि से देखा जाता है। कोर्ट ने गैंगरेप के फर्जी मामले में दो लोगों को बरी करते हुए उक्त टिप्पणी की। अदालत ने फर्जी मामला दर्ज करवाने वाली युवती के खिलाफ भी केस दर्ज करने को कहा।
द्वारका स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेन्द्र भट्ट ने फैसले में रेप के फर्जी मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्ति को अपमान का सामना करना पड़ता है। कोर्ट से बरी होने के बावजूद उसकी दुर्दशा जारी रहती है। ऐसे व्यक्ति के सम्मान और गरिमा को किसी भी मुआवजे या फैसले से बहाल करना असंभव है।
अदालत ने 11 नवंबर को दिए फैसले में कहा कि देखने में आया है कि फर्जी रेप या गैंगरेप के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे मामलों के कारण पुलिस और न्यायपालिका का कीमती समय नष्ट होता है।