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Republic Day: इस बार परेड में दिखेगी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल, 1,500 किलोमीटर दूर तक कर सकती है वार

Wed, 21 Jan 2026 03:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल पहली बार कर्तव्य पथ पर दुनिया के सामने अपनी धमक दिखाएगी।
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हाइपरसोनिक मिसाइल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगले सप्ताह गणतंत्र दिवस परेड में भारत पहली बार अपनी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल भी उतारने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल पहली बार कर्तव्य पथ पर दुनिया के सामने अपनी धमक दिखाएगी। यह अपनी एयरोडायनामिक दक्षता के कारण समुद्र में तैनात दुश्मन के युद्धपोतों को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती है।

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ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक रफ्तार से हमला करने वाली यह स्वदेशी मिसाइल 1,500 किलोमीटर दूर तक वार कर सकती है। साथ ही यह अलग-अलग प्रकार के पेलोड ले जाने में भी सक्षम है। अपनी हाइपरसोनिक गति और बदलते उड़ान प्रोफाइल के कारण इस मिसाइल को राडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों से रोक पाना बेहद कठिन है। इस तकनीक के साथ भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइपरसोनिक मारक क्षमता है।

ब्रह्मोस भी होगी आकर्षण का केंद्र : पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर सटीक निशाना साधने वाली तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस भी आकर्षण का केंद्र होगी। इसके अलावा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक एयर डिफेंस मिसाइलें आकाश और एमआर-सैम भी दिखाई देंगी। यह दुश्मन के हवाई हमलों को रोकती हैं। एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल नाग और बैलिस्टिक मिसाइल प्रलय भी कर्तव्य पथ पर भारत की स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करेंगी। भैरव बटालियन के जवान करेंगे कदमताल :  इस बार परेड का खास आकर्षण भैरव बटालियन होगी। यह सैन्य टुकड़ियां वास्तविक युद्ध की तरह कदमताल कर वास्तविक युद्ध की व्यूह रचना पेश करेंगी। इसके जरिये यह दिखाया जाएगा कि युद्ध के मैदान में क्रमवार ढंग से कैसे आगे बढ़ा जाता है।
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42 साल बाद सी कैडेट कोर की परेड में वापसी
इस बार गणतंत्र दिवस परेड में सी कैडेट कोर का दस्ता 42 साल बाद नौसेना की झांकी के साथ मार्च करता दिखाई देगा। नौसेना ने बताया, परेड में इस संगठन की महिला कैडेट कर्तव्य पथ पर मार्च करेंगी। चार दशक बाद कर्तव्य पथ पर लौटने पर यह दस्ता बेहद उत्साहित है। 13 मई 1938 को कराची में स्थापित सी कैडेट कोर एक गैर-सरकारी और स्वैच्छिक युवा संगठन है। इसकी स्थापना गोकलदास आहूजा ने की थी। देश के विभाजन के बाद यह संगठन मुंबई आ गया। पिछले 70 वर्षों में यह संगठन पूरे भारत में कई स्थानों में फैल चुका है।

अब तक इस संगठन से करीब 40,000 कैडेट सशस्त्र बलों और मर्चेंट नेवी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत हैं। नौसेना भी इस संगठन को अपनी गतिविधियों में शामिल करती रहती है। नौसेना के दस्ते की अगुवाई करने वाले कंटिंजेंट कमांडर लेफ्टिनेंट करण नाग्याल ने बताया कि परेड में कुल 144 जवान शामिल होंगे, जिनकी औसत उम्र 25 वर्ष है। इस दस्ते में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से चयनित जवान हैं, लिहाजा यह का मिनी-भारत का प्रतीक होगा। सभी जवानों ने दो महीने से अधिक समय का विशेष प्रशिक्षण लिया है। झांकी में आईएनएसवी कौंडिन्य का मॉडल शामिल नौसेना की झांकी-सशक्त राष्ट्र के लिए सशक्त नौसेना की अवधारणा पर आधारित है। 

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