नई दिल्ली।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने वायु प्रदूषण अनुपालन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में तलवंडी साबो पावर लिमिटेड को राहत देते हुए 33.02 करोड़ रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति पर सशर्त स्थगन प्रदान किया है। पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की, जबकि डॉ. ए सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल रहे। मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक अनुपालन के बीच संतुलन आवश्यक है। अधिकरण ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता छह सप्ताह के भीतर निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि का 50 फीसदी जमा कराए, तभी 1 अप्रैल 2026 का आदेश अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा। एनजीटी ने प्रतिवादियों को छह सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने और मूल अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
अपील में 1 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आयोग ने कोयले के साथ कम से कम 5 फीसदी बायोमास पेलेट/ब्रिकेट्स के अनिवार्य उपयोग के नियमों के उल्लंघन पर यह क्षतिपूर्ति लगाई थी। अपीलकर्ता कंपनी ने दलील दी कि टॉरिफाइड बायोमास पेलेट्स की कमी के चलते नियमों का पालन संभव नहीं हो सका। कंपनी के अनुसार, इस स्थिति को सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी ऑथॉरिटी द्वारा भी स्वीकार किया गया था, लेकिन इसके बावजूद दंड लगाया गया। वहीं, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने तर्क दिया कि बायोमास पेलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता थी और कंपनी द्वारा उनका उपयोग बेहद कम किया गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड लगाने से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।