राजधानी में पिछले सात वर्षों के दौरान हवा में मौजूद धूल और धुएं के कण (पीएम10) में 17 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक अध्ययन में सामने आई है। राहत की बात होने के बावजूद दिल्ली और एनसीआर के शहर अब भी देश के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल हैं। यह अध्ययन नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के सात साल पूरे होने पर किया गया है। इसमें 2025-26 तक के एयर क्वालिटी डाटा का विश्लेषण शामिल है।
पीएम10 ऐसे सूक्ष्म कण होते हैं, जो हवा में मौजूद धूल, धुआं और कालिख से बनते हैं। ये कण सांस के जरिये शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और फेफड़ों तथा सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पीएम10 का स्तर 2017-18 के 241 से घटकर 2025-26 में 201 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इसमें 2 फीसदी की मामूली कमी आई है।
एनसीआर के अन्य शहरों की बात करें तो गाजियाबाद सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया, जहां पीएम 10 का स्तर 215 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसके बाद दिल्ली 201 और नोएडा 195 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का स्थान रहा। मेरठ चौथे स्थान पर रहा, जहां पीएम10 का स्तर 158 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया।
नोएडा में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज
रिपोर्ट में बताया गया कि गाजियाबाद में 2017-18 के मुकाबले 24% की सबसे ज्यादा कमी आई है, जबकि नोएडा में 15% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद इन शहरों में प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय मानकों 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से काफी अधिक है। 2024-25 के मुकाबले देश के 60 शहरों में पीएम10 का स्तर कम हुआ लेकिन 30 शहरों में यह बढ़ गया। 27 शहरों में 40 फीसदी से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।
देहरादून इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां 75 फीसदी की कमी देखी गई। विशाखापत्तनम में प्रदूषण में 73 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुरुग्राम मार्च महीने में देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर रहा। यहां पीएम2.5 का औसत स्तर 116 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा।