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दिल्ली वालों के लिए राहत, नहीं बढ़ी बिजली की कीमत

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दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने इस वर्ष बिजली कीमत नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। आयोग के इस फैसले से जनता को राहत मिली है वहीं दिल्ली की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को जोर का झटका लगा है।
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आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में यह भी कहा है कि बीते वित्त वर्ष में डिस्कॉम्स को 2000 हजार करोड़ रुपये का लाभ हुआ है और पिछले दिनों आयोग की ओर से लिए गए कुछ निर्णयों की वजह से स्थिति में सुधार हो रहा है।

दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) के चेयरमैन पी.डी.सुधाकर और सदस्य जेपी सिंह और बीपी सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वित्त वर्ष-2015-16 के लिए किसी प्रकार की बिजली बढ़ोतरी करने का निर्णय नहीं लिया गया है। पुराने घाटे को कम करने के लिए लिया जा रहा आठ प्रतिशत का सरचार्ज जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
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डिस्कॉम्स को हुआ 2000 करोड़ रुपये का फायदा

वहीं पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (पीपीएसी) में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। पीपीएसी पर 12 जून-15 का फैसला मार्च-16 तक जारी रखा जाएगा। आयोग के चेयरमैन पी.डी.सुधाकर ने कहा कि वित्त वर्ष-2012-13 में डिस्कॉम्स का घाटा 13,982 हजार करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष-2013-14 में घाटा 12000 करोड़ रह गया है।

आयोग का कहना है कि डिस्कॉम्स को इस वित्त वर्ष में करीब 2000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। यही नहीं पिछले कुछ समय में आयोग की ओर से कुछ ऐसे निर्णय लिए गए जिसकी वजह से डिस्कॉम्स की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। बिजली उत्पादन कंपनी अंता, औरैया और दादरी से मंहगी बिजली को सरेंडर किया गया इसकी वजह से भी कीमतों पर असर पड़ा है।

चेयरमैन पी.डी.सुधाकर ने कहा कि कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटी के लिए सिंगल प्वाइंट कनेक्शन अब छह रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगा, जबकि पहले यह कीमत करीब सात रुपये थी।
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दिल्ली सरकार की ओर से मिल रही सब्सिडी जारी रहेगी

इसके बाद सोसायटी अपने उपभोक्ताओं को उसी दर पर बिजली देगी जिस दर और स्लैब पर आम बिजली उपभोक्ताओं को बिजली मिल रही है और दिल्ली सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी के भी हकदार होंगे।

दिल्ली विद्युत बोर्ड में कार्यरत कर्मियों के पेंशन के लिए 573 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दरअसल निजीकरण के पहले ही यह तय किया गया था कि दिल्ली विद्युत बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन की व्यवस्था डिस्कॉम्स को ही करनी होगी।

हालांकि इससे संबंधित कुछ मामले अदालतों में लंबित है। आयोग के चेयरमैन ने कहा कि पेंशन फंड के लिए दिल्ली सरकार की ओर से भी आग्रह किया गया था। इसके बाद आयोग की ओर से यह अंतरिम फैसला लिया गया है।

अदालत की ओर से यदि कोई आदेश आता है तो उसके अनुसार फैसले में बदलाव किया जा सकता है और उपभोक्ताओं से वसूली गई राशि उन्हें बिजली बिल के माध्यम से वापस लौटाई जा सकती है।

घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के अलावा औद्योगिक कार्य में लगे उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे टैरिफ में मामूली बदलाव किया गया है। पहले टाइम ऑफ डे टैरिफ का लाभ 50 किलोवाट तक कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को मिलता था। जिसे घटाकर अब 25 किलोवाट कर दिया गया है। यही नहीं 11 किलोवाट से 25 किलोवाट तक के लिए यह वैकल्पिक रहेगा। टाइम ऑफ डे टैरिफ पांच माह (मई से सितंबर) तक के लिए लागू रहेगा।
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