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झूठे शपथ पत्रों पर स्कूल बसों का पंजीकरण

Thu, 29 May 2014 10:32 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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निजी स्कूलों की मनमानी सिर्फ मोटी फीस वसूली में नहीं बल्कि सरकारी छूट हासिल करने में भी सामने आई है। कई नामी स्कूल प्रबंधकों ने बसों के पंजीकरण में भी धांधली की है।
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आरटीओ कार्यालय में झूठे शपथ पत्र दाखिल कर स्कूलों ने छात्रों के लिए निशुल्क ट्रांसपोर्टेशन उपलब्ध कराने का दावा किया, जबकि कुछ और है।

नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष राजेंद्र त्यागी ने बृहस्पतिवार को एक प्रेसवार्ता में स्कूलों की ओर से आरटीओ में दाखिल किए गए झूठे शपथ पत्रों की कापी दी गयी। इनमें डीपीएसजी स्कूल, नेहरू पब्लिक स्कूल समेत कई स्कूलों द्वारा जमा कराए गए शपथ पत्र हैं।

इनमें स्कूल प्रबंधन ने लिखा है कि वह इन वाहनों से समस्त गाजियाबाद क्षेत्र में बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने का कार्य निशुल्क करेंगे। राजेंद्र त्यागी ने कहा कि स्कूल बसों से सिर्फ कीमत का सात फीसदी एकमुश्त रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है।
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जबकि अन्य बसों से 132 रुपये प्रति सीट हर महीने चार्ज किया जाता है। आरोप है कि झूठे शपथ पत्रों से पंजीकरण पर छूट लेने के बावजूद ट्रांसपोर्ट के नाम पर एक से तीन हजार रुपये तक वसूल जाते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारी भी इन शपथ पत्रों पर भौतिक सत्यापन नहीं कर रहे हैं।

सस्ती जमीन लेकर अफसरों को भी दिखा रहे आंख
जीडीए ने स्कूलों को सस्ती दर पर प्लाट आवंटन कर खेल मैदान के लिए पार्क और ग्रीन बेल्ट सिर्फ 1-2 रुपये वर्ग मीटर की दर पर लीज पर दिए हैं। लीज डीड के मुताबिक इन पार्कों का इस्तेमाल सिर्फ स्कूल समय में छात्रों के खेल के लिए किया जा सकता है।

ताकि स्कूल अवधि के बाद यह पब्लिक के लिए इस्तेमाल हो सके। लेकिन स्कूलों ने इन्हें बिल्डिंग में शामिल कर लिया है। इन पार्कों में अब जनता की एंट्री बंद हो गई है।

झूठे शपथ पत्रों पर छूट लेने वाले स्कूलों पर कार्रवाई के लिए शासन से मांग करेंगे। कार्रवाई न हुई तो कोर्ट भी जाएंगे। स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे। -राजेंद्र त्यागी, निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष

नो प्राफिट, नो लॉस पर बसों का संचालन किया जा रहा है। अगर स्कूलों पर दबाव बनाया गया तो बसों का संचालन बंद कर वह कांट्रैक्ट पर बसें चलाएंगे। इससे बच्चों पर ट्रांसपोर्टेशन का भार और बढ़ जाएगा। - सुभाष जैन, चेयरमैन, इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ऑफ गाजियाबाद

2009 में डीएम से शिकायत पर बसों के पंजीकरण के लिए दिए जाने वाले एफिडेविट वाले नियम में बदलाव हो चुका है। अब सीबीएसई की गाइड लाइन पर पंजीकरण कराए जा रहे हैं। वाहन प्रोफिट के लिए नहीं छात्रों की सुविधा के लिए चलाए जा रहे हैं। - ज्योति गुप्ता, प्रिंसिपल, डीपीएसजी
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